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ग्रीन ऑर्किड में आरडब्ल्यूए गठन पर सवालों के बीच दूसरे पक्ष के अधूरे अभिलेख, निर्णय फिर टला, क्यों बच रहे सयाहक निबंधक

•शिकायतकर्ता पक्ष ने जवाब व साक्ष्य किए प्रस्तुत, 

 •अब सहायक निबंधक की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें

• ग्रीन ऑर्किड आरडब्ल्यूए विवाद: शिकायतकर्ता ने दिए पूरे       साक्ष्य, 

लखनऊ/मुरादाबाद। दिल्ली रोड स्थित ग्रीन ऑर्किड सोसायटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के गठन को लेकर चल रहा विवाद अभी निर्णय के दौर तक नहीं पहुंच पाया है। मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अपना लिखित जवाब, संबंधित अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि आरडब्ल्यूए अध्यक्ष पक्ष की ओर से निर्धारित समय में पूरे अभिलेख जमा नहीं किए गए थे। शेष दस्तावेज, विशेषकर वित्तीय प्रबंधन से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग गई थी।


ग्रीन ऑर्किड सोसायटी में आरडब्ल्यूए के गठन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सोसायटी के कुछ निवासियों की ओर से आरोप लगाया गया था कि आरडब्ल्यूए के गठन की प्रक्रिया में उन्हें समुचित जानकारी नहीं दी गई। इस संबंध में शिकायत रजिस्ट्रार कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद सहायक निबंधक कार्यालय की ओर से दोनों पक्षों को अपने-अपने अभिलेख, जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अपना लिखित जवाब, संबंधित प्रपत्र एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से आंशिक अभिलेख प्रस्तुत करते हुए विस्तृत प्रत्युत्तर तथा शेष आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। 

फैसले से पहले पूरी पत्रावली का इंतजार

मामले में अभी तक अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण सोसायटी के निवासियों की नजर सहायक निबंधक कार्यालय की अगली कार्रवाई पर है। एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष अपने अभिलेख प्रस्तुत कर चुका है, वहीं दूसरे पक्ष को शेष दस्तावेज दाखिल करने का अवसर दिया गया है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष अभिलेख जमा होने के बाद कार्यालय दोनों पक्षों के दस्तावेजों और साक्ष्यों का किस प्रकार परीक्षण करता है तथा आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

इस बीच यह चर्चा भी सामने आई थी कि सहायक निबंधक की ड्यूटी यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगाए जाने के कारण मामले की अग्रिम सुनवाई अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थी। हालांकि, कार्यालय की ओर से मामले में दस्तावेजी प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई थी।

पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल

मामले में निर्णय लंबित रहने के बीच सोसायटी के कुछ निवासियों की ओर से प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रकरण में दोनों पक्षों से अभिलेख मांगे जाने के बाद अब स्थिति स्पष्ट करने के लिए कार्यालय स्तर से आगे की कार्रवाई जल्द होनी चाहिए। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर यह कहा जा रहा है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों से आवश्यक अभिलेख प्राप्त करना और उनका परीक्षण करना जरूरी होता है।

सहायक निबंधक ने मीडिया को क्या कहा था

सहायक निबंधक आनंद विक्रम सिंह ने मीडिया को दिए बयान में ग्रीन ऑर्किड सोसायटी से संबंधित विवादित प्रकरण में कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया गया था। शिकायतकर्ता पक्ष ने अपना लिखित जवाब, संबंधित प्रपत्र और साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए हैं। दूसरे पक्ष की ओर से आंशिक अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं तथा विस्तृत प्रत्युत्तर और शेष आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है।

अब मामला शेष अभिलेख प्रस्तुत होने और उनके परीक्षण के बाद आगे बढ़ेगा। वही दूसरा पक्ष दावा कर रहा है कि उनके सभी प्रपत्र तैयार है। ऐसे में ग्रीन ऑर्किड सोसायटी के आरडब्ल्यूए गठन विवाद में अगली सुनवाई और सहायक निबंधक के निर्णय पर सोसायटी के निवासियों के साथ-साथ दोनों पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

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