प्रतापगढ़। गांधी जयंती के अवसर पर वृद्धाश्रम महुली, प्रतापगढ़ में वृद्धजनों एवं बच्चों के बीच अंतर-पीढ़ीगत जुड़ाव, संवाद, सम्मान एवं आपसी सीख को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार एवं क्षेत्रीय संसाधन प्रशिक्षण केंद्र (आरआरटीसी) के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी जी की स्मृति में दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके उपरांत बच्चों द्वारा गीत एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह एवं आत्मीयता से भर गया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों एवं बच्चों के बीच विभिन्न अंतर-पीढ़ीगत गतिविधियों का आयोजन किया गया। एक गतिविधि के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों ने बच्चों के साथ अपने जीवन के अनुभव, संघर्ष एवं सीख साझा की। बच्चों ने वरिष्ठजनों से संवाद करते हुए यह जाना कि वे अपने दादा-दादी एवं बुजुर्गों के जीवन अनुभवों से क्या सीख सकते हैं।
वहीं दूसरी गतिविधि में बच्चों ने वरिष्ठ नागरिकों को मोबाइल फोन चलाने, फोटो लेने तथा अन्य डिजिटल सुविधाओं के उपयोग की जानकारी दी। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने वरिष्ठजनों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया तथा दोनों पीढ़ियों के बीच आपसी सीख एवं सहयोग की भावना को मजबूत किया।
कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अन्य न्यायिक अधिकारीगण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त अधिकारीगण एवं समाजसेवी रोशन लाल उमरवैश्य, आरआरटीसी से अतुल सिंह एवं अभिषेक पटेल, वृद्धाश्रम प्रबंधक अम्बिका प्रसाद जी तथा वृद्धाश्रम का अन्य स्टाफ भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उपस्थित न्यायिक अधिकारियों एवं अतिथियों द्वारा वृद्धजनों से संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना गया तथा उनके सम्मान, अधिकारों एवं गरिमापूर्ण जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के माध्यम से वरिष्ठजनों के अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा बच्चों के माध्यम से वरिष्ठजनों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया गया। इस प्रकार की गतिविधियों से दोनों पीढ़ियों के बीच सम्मान, अपनापन, सहयोग और आपसी सीख की भावना को बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वृद्धजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, बच्चों में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता विकसित करना तथा दोनों पीढ़ियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।
