कुंडा/प्रतापगढ। जेल से जमानत से छूटने के बाद घर से एक साल से बाहर रहने के बाद भी पुलिस आरोपी के परिजनों और उसकी पत्नी पर अत्याचार कर रही है। घर से उसके परिजनों को जबरिया थाने उठा ले जाना और फिर वसूली करने के बाद रिहा कर देने सहित घर में घुसकर तोड़फोड़ करने और नगदी समेत गहना लूटने का आरोप बाघराय पुलिस पर लगा है। मामलें की शिकायत एसपी से की गई है।
बाघराय थाना क्षेत्र के मंडल भासौ गांव की रहने वाली साक्षी सरोज पत्नी राजबाबू सरोज ने बाघराय पुलिस पर बहुत ही गम्भीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसका पति चोरी के दो मामलें में आरोपी है और जेल जाने के बाद जमानत करवाने के बाद वह बीते एक वर्ष से पूना में रहकर नौकरी कर रहा है। जमानत होने के बाद भी बीते 23 अगस्त को बाघराय थाने के कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के सिविल ड्रेस में उसके घर पहुँचे और घर में घुसकर बिना किसी आरोप के उसके जेठ राजाबाबू को पकड़कर थाने उठा ले गए। पुलिस कर्मियों ने उसके देवर श्यामबाबू को भी हिरासत में लेने का प्रयास किया लेकिन वह भाग निकला। सुबह जब साक्षी अपने सास बरहीन को लेकर थाने गई तो थाने के एक सिपाही ने उसके जेठ को छोड़ने के एवज में उससे 23 हजार रुपए लिए और वादा किया कि अब उसके घर पर पुलिस दविश नही देगी और न ही तोड़फोड़ करेगी लेकिन बीते 30 सितंबर को शाम करीब साढ़े पांच बजे थाने के कुछ सिपाही एक निजी कार से उसके घर आए और आते ही गाली देते हुए उसके घर में घुसकर घर में रखी उसकी आलमारी और बक्से को तोड़ डाला तथा आलमारी में रखें दो जोड़ी पायल और बक्से में रखें दस हजार नगद को चुरा लिया। तोड़फोड़ का वीडियो साक्षी न बना सके, इसलिए पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल छीन लिया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उसके घर में रखे खाद्यान्न को फेंक दिया और आटा में पेशाब तक कर दिया और तथा बड़े साहब के नाम पर डेढ़ लाख रुपए की मांग की। पैसा न देने पर एनकाउंटर करने एवं फर्जी मुकदमें में फंसाने की धमकी दिया। पुलिसिया अत्याचार की शिकार हुई साक्षी ने पूरे मामलें की शिकायत एसपी से जनसुनवाई एप पर की है। इस संबंध में एसओ बाघराय श्रवण कुमार सिंह को फोन किया गया लेकिन उनका फोन नही उठा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब आरोपी को जमानत मिल गई और वो बाहर है तो किस आधार पर स्थानीय पुलिस लगातार दबिश देकर निर्दोषों का उत्पीड़न कर रही है? क्या लाइव लोकेशन सहित अन्य तथ्यों को आधार बनाकर मामलें की निष्पक्ष जांच होगी या महज शिकायतपत्र एक रद्दी का कागज बनकर रह जाएगा।
