बीसलपुर। रसया खांनपुर में डेंगू और बुखार के मामले फिर चिंता बढ़ाने लगे हैं। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर 165 लोगों की जांच की। मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू की जांच में तीन लोगों में डेंगू के संभावित लक्षण मिले हैं। हालांकि एलाइजा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग संभावित मरीजों का उपचार कर रहा है।
गांव में पिछले सप्ताह भी डेंगू के कुछ मरीज सामने आने की जानकारी है, जो उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं गांव के यूनानी चिकित्सालय के चिकित्सक के भी डेंगू संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है और उनका उपचार जारी है।
पिछले वर्ष भी रसयाखांनपुर में बुखार और डेंगू का प्रकोप सामने आया था और कई लोगों की मौत के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा था। इसके बावजूद इस बार फिर बीमारी के मामले सामने आने से ग्रामीणों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रोकथाम की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई। गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर, गंदगी और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सचिवालय के पास परिसर में पशु बांधे जाने से कीचड़ और गंदगी की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियां मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल हो सकती हैं। प्रधान और सचिव को सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. आलमगीर भी पूर्व में ग्रामीणों से साफ-सफाई रखने की अपील कर चुके हैं। वहीं बीडीओ सर्वेश कुमार ने अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की टीम लगाने और ग्राम पंचायत अधिकारी को सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
पिछले वर्ष के अनुभव के बावजूद इस बार समय रहते सफाई, जलभराव और मच्छर नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं हुई? बीमारी फैलने के बाद सफाई अभियान तेज करने के बजाय पहले से ही रोकथाम पर जोर क्यों नहीं दिया गया, यह सवाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
