पीलीभीतः रामलीला में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमानय कुंभकरण वध के बाद हुआ पुतला दहन! लक्ष्मण शक्ति, हनुमान-भरत मिलाप और कुंभकरण वध का हुआ सजीव मंचन, कल मेघनाद वध और सुलोचना सती की लीला
October 19, 2026
पीलीभीत। स्थानीय रामलीला मैदान में सोमवार को लक्ष्मण शक्ति, हनुमान-भरत मिलाप, विभीषण-कुंभकरण संवाद, कुंभकरण वध और पुतला दहन की लीलाओं का सजीव एवं मनमोहक मंचन किया गया। लीला के दौरान भगवान श्रीराम के जयकारों से रामलीला मैदान गूंज उठा। लक्ष्मण के मूर्छित होने से लेकर हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने और कुंभकरण वध तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कुंभकरण वध के बाद उसके पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में सुमन कंप्यूटर इंस्टीट्यूट के निदेशक सौरभ सक्सेना एवं सुरभि सक्सेना मुख्य अतिथि रहे।लीला का शुभारंभ दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध के प्रसंग से हुआ। रावण पुत्र मेघनाद ने वानर सेना पर प्रहार कर उसे क्षति पहुंचानी शुरू कर दी। प्रभु श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण ने मेघनाद का मुकाबला किया। युद्ध के दौरान मेघनाद ने अदृश्य होकर लक्ष्मण पर वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग किया, जिससे वह मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण की दशा देखकर प्रभु श्रीराम सहित पूरी वानर सेना शोक में डूब गई।विभीषण के सुझाव पर हनुमान जी सुषेण वैद्य को लेकर आए। सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण की मूर्छा दूर करने के लिए हिमालय पर्वत से संजीवनी बूटी लाने की बात कही। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी की तलाश में हिमालय की ओर उड़ चले। बूटी की पहचान नहीं होने पर वह पूरा पर्वत ही उठा लाए।अयोध्या के ऊपर से गुजरते समय भरत ने उन्हें आसुरी शक्ति समझकर बाण चला दिया। हनुमान जी के मुख से प्रभु श्रीराम का नाम सुनकर भरत को वास्तविकता का पता चला। हनुमान जी ने उन्हें पूरी घटना बताई, जिसके बाद भरत ने अपने तीव्रगामी बाण से उन्हें युद्धभूमि की ओर रवाना किया। संजीवनी बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई तो प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को हृदय से लगा लिया। इस प्रसंग पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।इसके बाद रावण ने अपने विशालकाय भाई कुंभकरण को युद्धभूमि में भेजा। कुंभकरण ने वानर सेना में भारी उत्पात मचाया। अंततः प्रभु श्रीराम ने अपने तीक्ष्ण बाणों से उसका वध कर दिया। इसके बाद कुंभकरण के पुतले का दहन किया गया। मंचन देखकर श्रद्धालु आनंदित हो उठे और पूरा मैदान प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंजने लगा। रामलीला के बाद वृंदावन से आए कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की भव्य लीलाओं का मंचन किया।
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