परमिशन का हवाला देकर उठ रहे सवालों को टालने का आरोप, खनन अधिकारी से संपर्क न होने पर भी सवाल
पूरनपुर। क्षेत्र में मिट्टी खनन और उसके परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं आरोप है कि दिन हो या रात, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही हैं परमिशन के नाम पर मिट्टी खनन का काम जारी होने की चर्चा है, लेकिन इसकी वैधता और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि मिट्टी खनन की अनुमति किन स्थानों के लिए जारी की गई है, उसकी अवधि क्या है और क्या वाहनों से हो रहा परिवहन निर्धारित नियमों के अनुरूप है? आरोप है कि जब लोग जानकारी मांगते हैं तो उन्हें परमिशन होने की बात कहकर जवाब दिया जाता है ऐसे में अनुमति से संबंधित स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी मामले में खनन अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किए जाने के बावजूद बात नहीं हो पाने की बात सामने आई है इससे विभागीय पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका सवाल यह है कि यदि खनन नियमों के मुताबिक हो रहा है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है? वहीं, अगर कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होंगे क्षेत्र में प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई के आरोप भी उठ रहे हैं। यदि पेड़ों का अवैध कटान हो रहा है तो यह पर्यावरण और हरियाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में वन विभाग की ओर से मौके पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पेड़ों की कटाई नियमानुसार हुई है या नहीं मिट्टी खनन की अनुमति, डंपर-ट्रैक्टरों से हो रहे परिवहन और पेड़ों की कटाई के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा फिलहाल, खनन में अधिकारियों की मिलीभगत या किसी के संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है ऐसे में निष्पक्ष जांच और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
