पीलीभीतः रामलीला में सीता हरण-जटायु युद्ध का सजीव मंचन, शबरी मिलन ने भावविभोर किए भक्त! स्वर्ण मृग के मोह से रावण ने किया सीता हरण, प्रभु राम ने जटायु को दी सद्गति
October 16, 2026
पीलीभीत। स्थानीय रामलीला मैदान में शुक्रवार को रामलीला के दौरान सीता हरण, रावण-जटायु युद्ध, राम-जटायु मिलन और शबरी मिलन की लीलाओं का सजीव एवं मनमोहक मंचन किया गया। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ दिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के वियोग तथा जटायु के बलिदान के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, वहीं शबरी की भक्ति ने भक्ति और समर्पण का संदेश दिया।खर-दूषण वध के बाद सूर्पणखा लंकापति रावण के दरबार में पहुंची और उसे पूरा घटनाक्रम सुनाया। क्रोधित रावण ने मामा मारीच के साथ मिलकर सीता हरण की योजना बनाई। मारीच ने प्रभु श्रीराम की दिव्यता का वर्णन करते हुए रावण को उनसे बैर न लेने की सलाह दी, लेकिन रावण की धमकी के आगे उसे स्वर्ण मृग का रूप धारण करना पड़ा। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने प्रभु राम से उसकी मृगछाला लाने का आग्रह किया। इसके बाद राम के वन में जाने और लक्ष्मण के कुटिया से दूर होने पर रावण ने सीता का हरण कर लिया।माता सीता की पुकार सुनकर गिद्धराज जटायु ने रावण से युद्ध किया, लेकिन रावण ने उनके पंख काट दिए। सीता की खोज में निकले प्रभु राम को घायल जटायु मिले। जटायु से पूरा घटनाक्रम जानने के बाद प्रभु राम ने उन्हें अपनी गोद में लेकर अंतिम विदाई दी और उनका अंतिम संस्कार किया।इसके बाद प्रभु राम शबरी के आश्रम पहुंचे। वर्षों से प्रभु की प्रतीक्षा कर रहीं शबरी ने उन्हें बेर खिलाए और उनसे नवधा भक्ति का उपदेश सुना। शबरी ने प्रभु राम को ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव से मिलने का मार्ग भी बताया। इस प्रसंग के मंचन के दौरान मैदान में जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे।रामलीला के समापन के बाद वृंदावन के कलाकारों द्वारा प्रतिदिन देर रात तक भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित भव्य रासलीला का मंचन भी किया जा रहा है। 15 अक्टूबर की रासलीला के प्रमुख यजमान सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष शैली अग्रवाल, कपीश अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, श्याम बाबू अग्रवाल और अजय अग्रवाल ने परिवार सहित ठाकुर जी एवं राधा रानी की भोग आरती की।कार्यक्रम में महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, अमरीश शर्मा अंबू, राकेश लोधी, नरेश शुक्ला, प्रेम सिंह, अंशुमान मिश्र, शेर सिंह लोधी, आयुष सक्सेना, संजीव मिश्रा, सुधीर पाल सिंह, संजीव शर्मा, प्रतीक अग्रवाल टिन्नी, अश्वनी उपाध्याय, संजीव चैहान, अवनीश शर्मा, संजीव मोहन अग्रवाल, मनोज गुप्ता, अमित जौहरी, आकाश कश्यप, विनीत शर्मा, सोमनाथ सप्रे, शंकरदत्त, नमन पाठक, आकाश सिंह, निखिल मिश्रा, पिंटू पाल, निर्भय लोधी और आलोक कुमार सहित अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। लीला का संचालन संजय पांडेय ने किया, जबकि रामायणी निशांत तिवारी और अंकुर मिश्रा ने रामचरितमानस की चैपाइयों का गायन किया।
