- हजारों कार्यकर्ताओं के सपा में शामिल होने का दावा, जिले की सियासत में बढ़ी हलचल
- शाने अली की वापसी को आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा
पीलीभीत। जिले की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री मरहूम हाजी रियाज अहमद के बेटे शाने अली ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को अलविदा कहकर समाजवादी पार्टी (सपा) में दोबारा वापसी कर ली है। पीलीभीत की 127 विधानसभा सीट से जुड़े इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। शाने अली की सपा में वापसी को जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं के तौर पर देखा जा रहा है।
दी गई जानकारी के मुताबिक, शाने अली ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उनके साथ विधानसभा क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ताओं के भी सपा में शामिल होने का दावा किया गया है। यदि यह संख्या संगठनात्मक सक्रियता में तब्दील होती है, तो इसका असर क्षेत्र में पार्टी की राजनीतिक तैयारियों पर पड़ सकता है।पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद का पीलीभीत की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ऐसे में उनके बेटे शाने अली की सपा में वापसी को महज एक दल बदलने की घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। उनकी वापसी से सपा को क्षेत्र में अपने पुराने संपर्कों और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने का अवसर मिल सकता है।वहीं, बसपा छोड़कर सपा में लौटने के इस फैसले के राजनीतिक निहितार्थों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि शाने अली की वापसी का पार्टी संगठन पर कितना असर पड़ता है और स्थानीय स्तर पर सपा अपनी राजनीतिक पकड़ को किस तरह मजबूत करती है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने पीलीभीत की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
