पीलीभीत। आगामी निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिले में मतदेय स्थलों के भौतिक सत्यापन और पुनर्गठन की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में सोमवार को गांधी सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें मतदान स्थलों की मौजूदा स्थिति, मतदाताओं की पहुंच और नए मतदेय स्थल बनाए जाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में मतदान स्थलों की दूरी और भवनों की स्थिति को प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया गया। ऐसे मतदेय स्थल, जो संबंधित गांव या बस्ती से दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर हैं, उन्हें मतदाताओं की सुविधा के अनुसार आसपास के उपयुक्त सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाएगा। वहीं, जिन पुराने भवनों की स्थिति सुरक्षित है और जहां पहुंचने में मतदाताओं को निर्धारित दूरी से अधिक नहीं चलना पड़ता, उन्हें यथावत रखने की व्यवस्था रहेगी। अत्यधिक जर्जर भवनों के स्थान पर सुरक्षित एवं स्थायी भवनों का चयन प्राथमिकता से किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदेय स्थलों के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से मिलने वाले दावों, सुझावों और आपत्तियों का पारदर्शिता के साथ निस्तारण किया जाएगा। जिन प्रस्तावों को स्वीकार अथवा अस्वीकार किया जाएगा, उनके कारणों का उल्लेख करते हुए विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा। यह जानकारी संबंधित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
मतदेय स्थलों से संबंधित आलेख्य सूची जिला निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। इससे आम नागरिक भी प्रस्तावित बदलावों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और अपनी आपत्तियां अथवा सुझाव दर्ज करा सकेंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भारत निर्वाचन आयोग की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार मतदेय स्थलों के सम्भाजन की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न होने पाए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1662 मतदेय स्थल और 967 मतदान केंद्र निर्धारित हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्वाचन आयोग की मंशा के अनुरूप मतदान से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), सभी उप जिलाधिकारी, निर्वाचन से जुड़े अधिकारी तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे।
