सुलतानपुरः पति की हत्या के बाद अफसरों के वादे भी रह गए अधूरे, आठ माह बाद भी विधवा परिवार को नहीं मिला आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ
October 02, 2026
लम्भुआ/सुलतानपुर।भरखरे गांव निवासी समर बहादुर वनवासी (49) की हत्या के बाद शासन-प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को मदद और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के किए गए वादे आठ माह बाद भी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। परिवार आज भी छप्पर के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर है। हालात यह हैं कि भारी बारिश में घर से सटे तालाब का पानी छप्पर में घुस गया और परिवार को तीन दिन तक चूल्हा तक नहीं जल सका कुछ माह पूर्व समर बहादुर वनवासी की अज्ञात लोगों ने हत्या कर शव नहर किनारे फेंक दिया था। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम ने भी पहुंचकर जांच की, लेकिन मौके से कोई खास सुराग बरामद नहीं हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक मृतक की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी। परिवार का कहना है कि समर बहादुर ही घर का एकमात्र कमाने वाला था और परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान तक नहीं था पोस्टमार्टम के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं था। परिवार की मांगों को लेकर काफी जद्दोजहद हुई। क्षेत्राधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के प्रयासों तथा परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार हो सका। उस समय अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि परिवार को पारिवारिक लाभ योजना, किसान बीमा, आवास समेत पात्रता के अनुसार अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इतना ही नहीं, परिवार को तहसील और ब्लॉक के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए लेखपाल और ग्राम विकास अधिकारी को घर पहुंचकर कागजी कार्यवाही पूरी कराने की बात भी कही गई थी।लेकिन आठ माह गुजरने के बाद परिवार का आरोप है कि न तो किसी योजना का लाभ मिला और न ही कोई अधिकारी-कर्मचारी दोबारा उनका हाल जानने पहुंचा हाल ही में भारी बारिश के बाद गांव में हुए नुकसान के दौरान मीडिया जब परिवार तक पहुंचा तो मृतक की बेटी शिल्पा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने कहा, ष्हमें किसी से कुछ नहीं कहना है, किस अधिकारी से क्या कहें। तीन दिन तक घर में पानी भरा रहा, खाना नहीं बन सका और हम भूखे रहे।ष्मृतक की विधवा सूर्यकली ने बताया कि घटना के बाद कुछ लोग घर के बाहर एक छोटा पोल गाड़कर चले गए थे और कहा था कि सुरक्षा के लिए इसमें कैमरा लगेगा, लेकिन आज तक पोल ही खड़ा है, कैमरा नहीं लगा। तालाब का पानी घर में भर जाता है और सांप-बिच्छू तक आने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो लगातार तहसील और ब्लॉक के चक्कर लगा सके। ष्कम से कम हमारा अधिकारकृआवास, शौचालय और पारिवारिक लाभकृतो अधिकारी दिला सकते थे।ष् ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के आश्वासन यदि सिर्फ अंतिम संस्कार कराने तक सीमित रह जाएं तो पीड़ित परिवार के जख्म और गहरे होते हैं। सवाल यह है कि हत्या के बाद जिस परिवार को सहारा देने का भरोसा प्रशासन ने दिया था, वह आठ महीने बाद भी सरकारी मदद की बाट क्यों जोह रहा है? अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर पात्रता की जांच कराएं और परिवार को आवास, पारिवारिक लाभ, शौचालय तथा अन्य पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि कागजों और मौखिक आश्वासनों से आगे बढ़कर सरकारी मदद वास्तव में पीड़ित परिवार के घर तक पहुंच सके।
