- एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, दोनों एसडीएम पद से हटाए गए
- 13 हजार से अधिक वोटों में गड़बड़ी के आरोप से गरमाई सियासत, सपा-कांग्रेस ने खोला मोर्चाय तत्कालीन डीएम की भूमिका पर भी उठे सवाल
पीलीभीत। सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला अब गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई और सियासी संग्राम में बदल गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों पर बृहस्पतिवार को दो उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) मयंक गोस्वामी और हेमंत चैधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। मामले में वीआरसी के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। सहायक निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कार्रवाई की पुष्टि की है।मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी स्तर पर कराई गई प्रारंभिक जांच में पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चैधरी पर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए। दोनों अधिकारी एसआईआर के दौरान निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पद पर तैनात थे। आयोग ने बुधवार को ही दोनों अधिकारियों को पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया था। वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। अब दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मामले को लेकर प्रशासन पर सवालों की बौछार कर दी है। दोनों दलों के नेताओं ने मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अनियमितताओं पर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने 13 हजार से अधिक वोटों में गड़बड़ी और कुल 16 हजार से अधिक वोटों में हेरफेर का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता पक्ष के एक मौजूदा विधायक के कथित इशारे पर अधिकारियों का सिंडिकेट काम कर रहा था। उन्होंने मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा।
इस मामले में समाजवादी पार्टी भी लगातार हमलावर है। सोमवार को सपा नेताओं ने ज्ञापन देकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था। सपा जिलाध्यक्ष धर्मेश गंगवार, पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा और पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां फूल बाबू ने प्रेसवार्ता कर प्रशासनिक अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया।सपा नेताओं का आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में अधिकारियों ने काम किया। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के बाद भी मतदाताओं के ईपीआईसी यानी वोटर पहचान पत्र नंबर बदले गए। पार्टी नेताओं ने आशंका जताई कि कथित अनियमितताओं के जरिए मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और मतदाता सूची की खामियों को दूर कर संशोधित सूची तैयार करने की मांग की।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने मतदाता सूची में कथित हेरफेर को गंभीर मामला बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग करते हुए आरोपों के पीछे कथित प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका जताई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
दो एसडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने, उन्हें पदों से हटाए जाने और कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब विभागीय जांच के साथ पुलिस की कार्रवाई पर भी निगाहें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां कैसे हुईं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और प्रभावित मतदाताओं के नाम व पहचान संबंधी विवरणों में सुधार किस तरह किया जाएगा।सपा और कांग्रेस के आरोपों ने इस प्रकरण को राजनीतिक रूप से और गरमा दिया है। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन कथित वोट हेरफेर के आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब निगाहें जांच पररू क्या मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों की पूरी परतें खुलेंगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी? और क्या मतदाताओं की सूची में पाई गई खामियों को दूर कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी? इन सवालों के जवाब अब जांच की दिशा और उसके निष्कर्षों पर निर्भर हैं।
