बीसलपुर। धान खरीद का सीजन शुरू होते ही किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में कुछ आढ़तियो पर किसानों से औने-पौने दामों पर धान खरीदने का आरोप लगा है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि किसानों से कम कीमत पर खरीदे गए धान का स्टॉक कर बाद में उसे सरकारी धान क्रय केंद्रों पर बेचने का प्रयास किया जा सकता है।
आरोप है कि कुछ व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर कम कीमत पर धान खरीद रहे हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। वहीं, बिना वैध लाइसेंस के धान खरीद की शिकायतों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार की ओर से किसानों से धान खरीदने के लिए क्रय केंद्र संचालित किए जाते हैं, ताकि उन्हें निर्धारित व्यवस्था के तहत अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। इसके बावजूद किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर खरीद की स्थिति और किसानों को मिल रहे लाभ की जांच जरूरी मानी जा रही है।
क्षेत्र में यदि बिना वैध लाइसेंस के धान की खरीद-बिक्री हो रही है, तो संबंधित विभागों को इसकी पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही आढ़तियों के लाइसेंस, खरीद-बिक्री के अभिलेख, धान के स्टॉक और सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे जा रहे धान की जांच कराई जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं निजी व्यापारियों से खरीदे गए धान को किसानों की उपज बताकर सरकारी खरीद में शामिल तो नहीं किया जा रहा है।
धान खरीद के सीजन में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक निगरानी महत्वपूर्ण है। अब सवाल यह है कि बिलसंडा क्षेत्र में सामने आ रहे आरोपों को लेकर संबंधित विभाग कब जांच शुरू करेंगे। यदि शिकायतों में सच्चाई मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
