विधायक डॉ. नीरज बोरा के प्रयासों से बना 43 करोड़ का नाला, स्थानीय निवासियों ने की सराहनाय राहत शिविरों व आवागमन का बना मुख्य आधार
लखनऊ। फैजुल्लागंज क्षेत्र में हाल ही में आए जलभराव और बाढ़ के विकट संकट के दौरान ककौली से दाउदनगर होते हुए गोमती नदी तक बना लगभग नौ किलोमीटर लंबा नाला स्थानीय निवासियों के लिए एक श्सुरक्षा कवचश् साबित हुआ है। भले ही गोमती नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हुआ, लेकिन इस नाले की ऊंचाई ने बाढ़ के पानी को कई घनी बस्तियों में फैलने से रोक लिया।
बाढ़ और जलभराव के दौरान इस नाले ने न केवल जल निकासी में मदद की, बल्कि राहत व बचाव कार्यों का मुख्य केंद्र भी बना। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने इसी नाले पर अपने राहत शिविर लगाए। इसके अलावा, डूब क्षेत्र में लोगों के आने-जाने का एकमात्र जरिया भी यही नाला बना।स्थानीय निवासियों ने नाले के निर्माण पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह संरचना न होती तो स्थिति बेहद भयावह हो जाती।
विनोद जायसवाल (दाउदनगर निवासी)रू ष्नाले की ऊंचाई तीन से चार फीट होने के कारण गोमती का पानी दूसरी ओर नहीं फैल सका, जिससे एक बहुत बड़ा आवासीय क्षेत्र डूबने से बच गया। नादिर खान (स्थानीय दुकानदार)रू ष्नाले की दीवार के कारण पानी हाइजीन इंस्टीट्यूट की तरफ नहीं बढ़ पाया और मेरी दुकान सुरक्षित रही। अगर यह नाला न होता तो अल्लूनगर डिगुरिया तक का पूरा इलाका पानी में डूब जाता।
नगर निगम के अभियंता विनोद पाठक के अनुसार, सीवरेज एवं जल निकासी परियोजना के तहत क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा के प्रयासों से लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत से इस नाले का निर्माण एक वर्ष पूर्व हुआ था। लंबाईरू लगभग 9 किलोमीटर (ककौली से दाउदनगर होते हुए गोमती नदी तक)चैड़ाई व गहराईरू शुरुआत में 2 मीटर, जो गोमती नदी के पास पहुंचते-पहुंचते 4 मीटर तक हो जाती है।हालात सामान्य हो रहे, विकास कार्यों में तेजी लाएंगे रू डॉ. नीरज बोरा क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा ने बताया कि बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाना और जनजीवन सामान्य करना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है।
