लखनऊ। ष्जल ही जीवन हैष् की कहावत को शायद लखनऊ नगर निगम और जिला प्रशासन ने कुछ ज्यादा ही दिल से लगा लिया है। राजधानी के उत्तरी इलाके और फैजुल्लागंज की हालत देखकर तो यही लगता है कि यहाँ विकास की धारा नहीं, बल्कि श्विकास का जलप्रपातश् बह निकला है। गोमती नदी के उफान और बदहाल ड्रेनेज सिस्टम के कारण क्षेत्र के 50 से अधिक मोहल्ले पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। पिछले 8 दिनों से लगभग 40 हजार घरों में पानी भरा हुआ है और 3 लाख से अधिक की आबादी नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है।
समय रहते सीवर और ड्रेनेज लाइन के पुख्ता इंतजाम करने में नाकाम रहे जनप्रतिनिधि और अफसर अब नावों पर सवार होकर राशन बांटने और श्फोटो सेशनश् करने का स्वांग रचा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विधायक, सांसद, नगर आयुक्त और एलडीए के जिम्मेदार अफसरों के पास इस मानवीय त्रासदी का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं है। कागजी वादों और खोखले दावों के बीच जमीन पर पानी रत्ती भर भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
इलाके में कई-कई फीट पानी भरने से सड़कें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं और आवागमन के सारे साधन ठप हैं। सड़ांध मारते पानी के बीच लोग छतों और शिलापट्टों पर बैठने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के ठप होने से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन प्रशासन राहत सामग्री के नाम पर महज खानापूरी करने में लगा है।
जनता का सवाल है कि आखिर कब तक स्मार्ट सिटी की यह कड़वी हकीकत कागजी दावों के नीचे दबाई जाएगी और कब फैजुल्लागंज के निवासियों को इस श्जलप्रपातश् से निजात मिलेगी?
