लखनऊ। नगर निगम जोन-6 के माननीय कल्याण सिंह वार्ड (सदरौना) में विकास के नाम पर सरकारी धन के बेजा इस्तेमाल का एक चैंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तम मैरिज हॉल के पास स्थित श्श्री साई बसेरा सोसाइटीश् की पहले से अच्छी और दुरुस्त डामर सड़क पर नगर निगम द्वारा दोबारा पैचिंग कराई जा रही है। एक तरफ जहां इलाके की दर्जनों अंदरूनी गलियां सालों से गड्डों, जलभराव और बदहाली का दंश झेल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ चमकती सड़क पर डामर की परत चढ़ाकर चूना लगाने की तैयारी पूरी दिख रही है।
प्राप्त जानकारी और वायरल रिकॉर्डिंग के अनुसार, यह पूरा खेल श्पैचिंग वर्कश् के नाम पर बजट खपाने की साजिश की ओर इशारा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सोसाइटी की मुख्य सड़क बिल्कुल ठीक-ठाक थी, तो फिर जनहित के मद से लाखों रुपये का बजट इसी सड़क पर क्यों न्योछावर किया जा रहा है? स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिनकी गलियों में पानी भरा है और चलना दूभर है, उनकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं, लेकिन दुरुस्त सड़कों पर रातों-रात सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और गंभीर पहलू यह है कि क्षेत्र के स्थानीय पार्षद तक को इस कार्य की कोई पूर्व सूचना या विवरण नहीं दिया गया। जनप्रतिनिधि से जानकारी छिपाकर गुपचुप तरीके से कराया जा रहा यह ठेकेदारी का खेल सीधे तौर पर अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़े करता है। जोन-6 के अधिशासी अभियंता (ग्म्छ) और संबंधित जूनियर इंजीनियर (श्रम्) की कार्यप्रणाली, मॉनिटरिंग और सड़कों के चयन की प्राथमिकता अब गंभीर जांच के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल कि प्राथमिकता का पैमाना क्या है? नगर निगम के इंजीनियरों को बदहाल और पानी से लबालब गलियां क्यों नहीं दिखतीं? क्या ठेकेदारों के बिल पास कराने के लिए सिर्फ आसान और बनी-बनाई सड़कें ही दिखती हैं? जब काम ईमानदारी से हो रहा है, तो स्थानीय पार्षद और जनता से कार्य योजना की जानकारी छिपाने की क्या मजबूरी थी? जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों की इस तरह बर्बादी करने वाले अधिशासी अभियंता और जेई पर क्या उच्चाधिकारी कोई कार्रवाई करेंगे, या यह मामला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?।
