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प्रतापगढः जिले में 21,782 मीट्रिक टन यूरिया, 6336 मीट्रिक टन डीएपी व 6631 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध! किसान जरूरत के अनुसार ही करें उर्वरकों का प्रयोग, अनावश्यक भंडारण से बचें-जिला कृषि अधिकारी


प्रतापगढ़। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को बताया है कि जिले में रबी फसलों की बुवाई के दृष्टिगत किसानों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होने किसानों से अपील की है कि वे फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें तथा किसी भी उर्वरक का अनावश्यक रूप से भंडारण न करें।

उन्होने बताया है कि जनपद में वर्तमान में 21,782 मीट्रिक टन यूरिया, 6,336 मीट्रिक टन डीएपी तथा 6,631 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। जिले की सभी समितियों पर मांग के अनुसार संबंधित विभागों द्वारा उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की नियमित निगरानी भी की जा रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होने बताया है कि शासनादेश के अनुसार एक किसान को उसकी कृषि भूमि के प्रति हेक्टेयर के आधार पर अधिकतम डीएपी के 05 बैग एवं यूरिया के 07 बैग ही दिए जाने का प्रावधान है। निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक का भंडारण किए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। जनपद की सभी समितियों पर उनकी मांग के अनुसार सम्बन्धित विभागों द्वारा उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा हैै। उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है, जिससे कृषकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होने किसानों को सलाह दी है कि रबी फसलों की बुवाई के समय एनपीके एवं एसएसपी जैसे उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण तथा फसल की आवश्यकता के अनुसार करें। संतुलित उर्वरक प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। विभाग ने जैविक विकल्पों के रूप में पीआरओएम, पीडीएम तथा जैविक खाद एवं जैव उर्वरकों के प्रयोग को भी प्रोत्साहित किया है। जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक बिक्री पर अनिवार्य रूप से कैश मेमो उपलब्ध कराया जाए तथा पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक की बिक्री सुनिश्चित की जाए। स्टॉक रजिस्टर को नियमित रूप से अद्यतन रखने और किसानों को उनकी जोत एवं निर्धारित मानकों के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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