- एक वोटर को दो जगह दिखाकर 13,150 से 26,300 तक पहुंचाई गई संख्या
- ठेकेदारों और बिल्डरों के मजदूरों को वोटर बनाने का दावा, पूर्व डीएम ज्ञानेंद्र सिंह पर एफआईआर कराने की चेतावनी
- चुनाव आयोग की कार्रवाई से असंतुष्ट कांग्रेस नेता बोले
- रिपोर्ट मांगी जाएगी तो कहां से देंगे? जिम्मेदारी से बच नहीं सकते अधिकारी
पीलीभीत। जिले की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने गंभीर आरोप लगाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि कई महीनों तक मतदाता सूची के एक-एक वोट की जांच कराई गई, जिसमें कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने ठेकेदारों और बिल्डरों के मजदूरों को मतदाता बनाने, एक ही मतदाता को अलग-अलग स्थानों पर दर्ज करने और 13,150 वोटों को 26,300 के रूप में दिखाए जाने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कुमुद गंगवार ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस मामले की पड़ताल के लिए करीब 10 से 12 लोगों की टीम लगाई गई थी। उनके मुताबिक, कुछ लोग नवाबगंज, कुछ शाहजहांपुर और कुछ सीतापुर में बैठकर मतदाता सूचियों की जांच कर रहे थे। टीम के सदस्यों को अलग-अलग मतदाताओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि प्रत्येक नाम और विवरण को बारीकी से परखा जा सके।उन्होंने बताया कि एक मतदाता सूची में लगभग 945 से 1,045 तक नाम होने के कारण प्रत्येक प्रविष्टि की जांच करना काफी मेहनत का काम था। जांच के दौरान जब लगभग 50 प्रतिशत आंकड़े सामने आ गए, तब उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व को इसकी जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि पूरे मामले से जुड़े साक्ष्य सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में तैयार किए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में ठेकेदारों और बिल्डरों के मजदूरों के नाम मतदाता के रूप में दर्ज किए गए हैं। उन्होंने एक ही मतदाता को अलग-अलग स्थानों पर दिखाए जाने का भी दावा किया। उनका कहना है कि वह ठेकेदारों के हिसाब से मतदाताओं का ब्योरा जुटाकर यह स्पष्ट करेंगे कि किस ठेकेदार के कितने कथित फर्जी मतदाता हैं। श्री गंगवार ने सवाल उठाया कि यदि एक ही मतदाता को अलग-अलग स्थानों पर दर्ज किया गया है, तो वास्तविक और कथित फर्जी मतदाता के बीच अंतर की जांच कैसे की गई? उन्होंने 13,150 और 26,300 के आंकड़ों का हवाला देते हुए मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
कुमुद गंगवार ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ी के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि मुस्लिम महिलाएं भी भाजपा को वोट दे रही हैं। यह कांग्रेस नेता का आरोप है, जिसकी पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उनके पास इस मामले से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं और वह जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक करेंगे। उनके आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और भाजपा पक्ष का जवाब सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता ने तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संभव है कि कथित गड़बड़ी जिलाधिकारी की जानकारी के बिना हुई हो, लेकिन यदि किसी अधिकारी के अधीन ऐसी अनियमितता होती है और उसकी निगरानी नहीं हो पाती, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। कुमुद गंगवार ने सवाल किया कि जब प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के अधीन कामकाज होता है, तो निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कुमुद गंगवार ने कहा कि वह चुनाव आयोग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने पूर्व जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह समेत कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर कराने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वह मामले को कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाएंगे और अपनी शिकायत की प्रतियां राष्ट्रपति, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के संबंधित अधिकारियों तक भेजेंगे।उन्होंने सत्र न्यायालय में दंड प्रक्रिया से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जाने और हाईकोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल करने की बात भी कही।कांग्रेस नेता ने कहा, “मैं कभी हवा में बात नहीं करता, पहले काम करता हूं, उसके बाद बात करता हूं।” उन्होंने दावा किया कि उनके पास सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में साक्ष्य उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रस्तुत किया जाएगा।
गंगवार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से जुड़े इस मामले को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के माध्यम से सुप्रिया जी, राजेंद्र पाल गौतम और मोना जी की मौजूदगी में उठाया गया। उन्होंने कहा कि वह इस प्रकरण को आगे तक ले जाएंगे और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग जारी रखेंगे।
पीलीभीत की मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस नेता के इन आरोपों के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों में कथित दोहरी प्रविष्टियों और अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है या नहीं। साथ ही, चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।फिलहाल, 13,150 वोटों को लेकर किया गया दावा, ठेकेदारों के मजदूरों को मतदाता बनाने के आरोप और पूर्व डीएम के खिलाफ एफआईआर की चेतावनी इस पूरे प्रकरण के प्रमुख बिंदु हैं। आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगा।
