रेणुकूट, सोनभद्र। संस्कार भारती, सोनभद्र के तत्वावधान में हिण्डाल्को प्रेक्षागृह, रेणुकूट में रविवार को “श्रीकृष्ण रूप सज्जा - बाल गोकुलम्” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 61 नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप में सजकर अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिण्डाल्को रेणुकूट परिवार के प्रमुख समीर नायक, स्मेल्टर प्लांट हेड जयेश पवार, संस्कार भारती के अध्यक्ष आनंद सिंह, उपाध्यक्ष अश्वनी मिश्रा तथा कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र सिंह शेखावत ने भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर श्याम नारायण चौबे ने संस्था का ध्येय गीत प्रस्तुत किया, जबकि संस्था का परिचय शिप्रा उपाध्याय ने दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत गीता सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत गणेश पुष्पांजलि नृत्य से हुई। इसके बाद श्रीकृष्ण के रूप में सजे बच्चों ने मोर मुकुट, बांसुरी और माखन की मटकी के साथ मंच पर बाल लीलाओं की मनोहारी प्रस्तुति दी। गीता मौर्या के निर्देशन में बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्यों ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका राजेंद्र यादव, उमा मेनन एवं शिखा सिंह ने निभाई। प्रतिभागियों का मूल्यांकन वेशभूषा, भाव-भंगिमा और मंचीय प्रस्तुति के आधार पर किया गया।
प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में अधिषी सिंह ने प्रथम, ओशी कुशवाहा ने द्वितीय तथा अविष्का पाठक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं कनिष्ठ वर्ग में इरा नीरज सिंह प्रथम, रिधि श्रेयांशी जेना द्वितीय और इवान त्रिपाठी तृतीय स्थान पर रहे। हिण्डाल्को प्रबंधन की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि समीर नायक ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को संस्कारवान बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि जयेश पवार ने कहा कि परिवार बच्चों की पहली पाठशाला है और संस्कारवान पीढ़ी ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला होती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्कार भारती और हिण्डाल्को परिवार के अनेक सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन विवेक अग्रवाल, अश्वनी मिश्रा एवं शिप्रा उपाध्याय ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन और वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
