लखनऊ। जिस दौर में पूरी दुनिया खौफ के साये में थी, तब अपनी जान की बाजी लगाकर सड़कों पर दौड़ने वाले एंबुलेंस कर्मचारियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। श्जीवन दाहिनी स्वास्थ्य विभाग 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघश् ने प्रदेश सरकार और उप-मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य मंत्री) के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। 9000 बेरोजगार एंबुलेंस कर्मियों की तत्काल बहाली की मांग को लेकर उग्र हुए कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग की बाकायदा श्शव यात्राश् निकाली और जोरदार नारेबाजी करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का दर्द इस बात को लेकर छलका कि महामारी के दौर में जिस सरकार ने उन पर फूल बरसाए थे, आज वही तंत्र उन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक चुका है। संघ के नेताओं का आरोप है कि महामारी के दौरान अग्रिम मोर्चे पर डटे रहने वाले करीब 3000 कोरोना योद्धाओं को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया। इतना ही नहीं, सिलसिलेवार तरीके से अब तक लगभग 9000 एंबुलेंस कर्मचारी अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं। वर्ष 2012 से 2021 तक लगातार अपनी जवानी इस सेवा को देने के बाद अब ये कर्मचारी श्ओवरएजश् हो चुके हैं, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ अपनी बहाली की मांग ही नहीं उठाई, बल्कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के संचालन में हो रहे कथित भ्रष्टाचार की परतें भी उधेड़ दीं। कर्मचारियों का गंभीर आरोप है कि इस सेवा के नाम पर फर्जी मरीजों के केस दिखाए जा रहे हैं, एंबुलेंस के कागजी मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है और गाड़ियों में फर्जी डीजल चढ़ाकर सरकारी खजाने की खुलेआम लूट हो रही है।कर्मचारियों ने इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें प्रमुख मांगे रखी गई हैं कि हटाए गए सभी कोरोना योद्धाओं और एंबुलेंस कर्मियों की ससम्मान बहाली की जाए। बकाया ओवरटाइम, अतिरिक्त कार्य का भुगतान, न्यूनतम वेतन और नियमानुसार बोनस दिया जाए। कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश, वेतन पर्ची और सेवा समाप्ति पर तय मुआवजा प्रदान किया जाए।
कर्मचारी संघ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन यहीं नहीं थमेगा बल्कि पूरे प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील कर दिया जाएगा। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य महकमे की इस भारी फजीहत और उग्र होते विरोध प्रदर्शन पर शासन क्या रुख अपनाता है।
