लखनऊ। राजधानी में श्स्मार्ट सिटीश् के तमाम दावों को मुंह चिढ़ाती एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है। शहर के बेहद व्यस्त आईटी चैराहे से ठीक पहले, मुख्य मार्ग पर अचानक सड़क भरभराकर धंस गई और बीचोबीच करीब 10 फीट से ज्यादा गहरा और जानलेवा गड्ढा बन गया। हादसा और भी संवेदनशील जगह पर हुआ, क्योंकि यह खौफनाक गड्ढा प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के आवास के ठीक सामने बना है।
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे खौफनाक मंजर तब देखने को मिला जब वहां से गुजर रहा एक बेखबर बाइक सवार सीधे इस 10 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा। राहगीर जब तक कुछ समझ पाते, युवक चीख-पुकार मचाता हुआ मलबे के बीच नीचे दबा पड़ा था। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई और भारी मशक्कत के बाद गंभीर रूप से घायल युवक को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और जल कल विभाग के भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही का जिंदा सबूत है। सवाल यह उठता है कि जिस मार्ग से रोजाना वीवीआईपी मंत्रियों और आला अधिकारियों का काफिला गुजरता है, वहां की सड़क अचानक ताश के पत्तों की तरह कैसे ढह गई ? क्या मानसून के दौरान या पाइपलाइन बिछाने के नाम पर हुए घटिया निर्माण कार्य की कोई जांच नहीं होती ?
हर साल मेंटेनेंस और सड़क निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट कागजों पर बहा दिया जाता है। लेकिन धरातल पर जनता को क्या मिलता है ? श्10 फीट गहरा मौत का कुआंश्। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सड़क में पिछले कुछ दिनों से हल्का धंसाव दिख रहा था, लेकिन शिकायतों के बावजूद सोए हुए प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। जब एक आम नागरिक का खून सड़क पर बह गया, तब जाकर विभागीय अफसर खानापूर्ति के लिए बैरिकेडिंग लगाने पहुंचे।
अगर यह हादसा रात के अंधेरे में होता या कोई चार पहिया वाहन या स्कूली बच्चों से भरी बस इसकी चपेट में आती, तो मौतों का आंकड़ा कितना बड़ा हो सकता था? जनसुविधाओं का ढिंढोरा पीटने वाला प्रशासन अब किस मुंह से खुद को श्स्मार्टश् कहेगा ?
अब सवाल यह उठता है कि घटिया सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों और जांच करने वाले इंजीनियरों पर एफआईआर कब दर्ज होगी ? घायल युवक के इलाज का खर्च और मुआवजा कौन देगा ? क्या लखनऊ की सड़कें अब लोगों के सफर के लिए नहीं, बल्कि उनकी जान लेने के लिए तैयार की जा रही हैं ?
जब तक लापरवाह अफसरों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लखनऊ की चमचमाती सड़कों के नीचे ऐसे ही डेथ ट्रैप आम नागरिकों की जान से खेलते रहेंगे।
