Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

प्रतापगढः दो माह पूर्व शपथपत्र देकर हुई शिकायत, अब तक नही हुई जांच, शिकायतकर्ता हुआ परेशान


बाबागंज/प्रतापगढ़। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस और पारदर्शी प्रशासन के दावों की हवा कालाकांकर विकासखंड की ग्राम पंचायत वाजिदपुर में निकलती नजर आ रही है। गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ जब एक ग्रामीण ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने शपथपत्र देकर शिकायत कर दिया, तब भी तंत्र की नींद नहीं टूटी। शपथपत्र पर हुई इस शिकायत के दो माह बीत जाने के बाद भी जांच का न शुरू होना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मामला वाजिदपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2021 से 2026 के दौरान इंडिया मार्का हैंडपंपों की रिबोरिंग और मरम्मत के नाम पर हुए  21 लाख रुपये के घोटाले से जुड़ा है। गांव के रहने वाले अजय कुमार तिवारी ने गत 28 जुलाई को जिलाधिकारी को शपथपत्र सौंपकर करीब 58 हैंडपंपों की मरम्मत व रिबोर के नाम पर हुए इस बड़े खेल का भंडाफोड़ किया था। हलफनामे में सीधे तौर पर तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं वर्तमान प्रशासक एवं तत्कालीन पंचायत सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी धन डकारने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि ग्राम विकास अधिकारी का 30 जून को यहां से स्थानांतरण हो चुका था, इसके बावजूद 16 जुलाई को बिना कोई काम कराए कागजों पर ही लाखों रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया। शिकायत में स्पष्ट रूप से स्थलीय, तकनीकी और वित्तीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों व तत्कालीन प्रधान से सरकारी धन की वसूली और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

लेकिन अफसोसजनक पहलू यह है कि सामान्य शिकायती पत्र के बजाय जब शिकायतकर्ता ने घोटाले की शिकायत  शपथग्रहण देकर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई, तब भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। दो महीने से फाइल का दफ्तरों के चक्कर काटना यह साबित करता है कि या तो अधिकारियों को लाखों रुपये के इस गबन में कोई अनियमितता नजर नहीं आती या फिर वे भ्रष्टाचार के इस खेल पर पर्दा डालने की कोशिश में लगे हैं। अब देखना यह होगा कि मामले की जांच कर सच सामने लाया जाता है या जनहित से जुड़ी यह गंभीर शिकायत भी सरकारी फाइलों के अंबार में हमेशा के लिए दफन होकर रह जाएगी। शिकायतकर्ता का कहना है कि डीएम ने सीडीओ को और सीडीओ ने डीडीओ को जांच के लिए मामला सौंपा है लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी डीडीओ ने जांच कराना मुनासिब नही समझा। उनका यह भी कहना है कि जिले के अंतिम छोर पर गांव होने के कारण उनको जिला मुख्यालय पर आने-जाने एवं अपनी शिकायत की पैरवी करने में भी वित्तीय समस्या का सामना करना पड़ रहा है।जिसका फायदा सम्बंधित अधिकारी उठा रहें हैं। 

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |