मगरमच्छ ने किसान को पानी में खींच लिया, दी दर्दनाक मौत
September 23, 2026
बिहार के बगहा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक किसान को मगरमच्छ पानी में खींच ले गया, जिससे किसान की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बड़ी ख़बर बगहा से है जहां इन दिनों मगरमच्छों का आतंक जारी है। कभी रिहायशी इलाकों में तों कभी मुख्य सड़क पर मगरमच्छ निकलने का सिलसिला थम नहीं पाया था और अब नदी किनारे गए किसान की मौत मगरमच्छ के हमले में हो गई है।
दरअसल वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के सेमरीडीह गांव के समीप नदी में पानी छूने गए भीम बीन नामक किसान पर एकाएक मगरमच्छ ने हमला कर दिया। मगरमच्छ के हमले में ग्रामीण भीम बीन की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मगरमच्छ के हमले की इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, सेमरीडीह गांव निवासी भीम बीन अपने घर से कुछ दूरी पर खेत में शौच करने गए थे। शौच के बाद जब वे पास से गुजर रही सहायक नदी में पानी छूने पहुंचे तभी मगरमच्छ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। मगरमच्छ नें हमले के बाद भीम बीन को नदी में खींच लिया।
वहां से गुजर रहें कुछ लोगों ने उन्हें नदी की तरफ जाते देखा था। लिहाजा लोगों ने इसकी जानकारी मृतक के पोते सुग्रीव बीन और उनकी पत्नी को दी। जानकारी मिलते ही परिजन नदी के आसपास उनकी तलाश में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को काबू में कर भीम बीन को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
इधर घटना की सूचना मिलने के बाद वाल्मीकिनगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बगहा अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया। मगरमच्छ के हमले की इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने नदी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मगरमच्छों से बचाव के लिए वन विभाग प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
बता दें कि भारत में चंबल नदी के बाद नेपाल से निकलने वाली नारायणी गंडक नदी मगरमच्छ अधिवास का दूसरा बड़ा ठिकाना है। यही वज़ह है कि गंडक में हजारों की तादाद में मगरमच्छ हैं जो सहायक नहरों, नालों औऱ सहायक छोटी नदियों में पहुंच गए हैं यहां तक की कई बार ऐसे मगरमच्छ रिहायशी इलाकों में देखें जा रहें हैं, जिससे जान माल का खतरा बढ़ गया है, हालांकि वन विभाग की ओर से सतर्कता की अपील की गईं है। साथ हीं समय समय पर पीड़ितों को मुआवजा भी दिया जा रहा है लेकिन मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम नहीं लें रही हैं।
इससे पहले भी मगरमच्छ नदी से निकलकर रिहायशी इलाके में पहुंचा था और ग्रामीणों में हड़कंप मचा था।
