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प्रतापगढः सर्पदंश की घटनाओं को न्यूनतम करने तथा जनहानि की रोकथाम के लिये एडवाइजरी जारी! सर्पदंश से घबराएं नहीं, समय पर अस्पताल पहुंचें - अपर जिलाधिकारी


प्रतापगढ़। जिले में जिलाधिकारीध्अध्यक्ष जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के निर्देशों के क्रम में जनपद में सर्पदंश की घटनाओं को न्यूनतम करने तथा जनहानि की रोकथाम के उद्देश्य से अपर जिलाधिकारी (वि0ध्रा0) आदित्य प्रजापति द्वारा आमजन के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में सर्पदंश से बचाव, सांप की पहचान, सर्पदंश के लक्षण, प्राथमिक उपचार तथा क्या करें और क्या न करें के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।

एडवाइजरी के अनुसार भारत में 270 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें कुछ ही प्रजातियां जहरीली हैं। इनमें ‘बिग फोर’ जहरीले सांप-करैत, कोबरा, रसेल वाइपर तथा सॉ-स्केल्ड वाइपर को प्रमुख रूप से खतरनाक माना गया है। करैत प्रायः रात में अधिक सक्रिय रहता है, इसका रंग चमकदार काला या नीला, सफेद पतली धारियां होती है और इसके काटने पर शुरुआती दर्द बहुत कम या नहीं भी हो सकता है, लेकिन जहर बहुत तेजी से असर करता है। कोबरा का रंग काला, भूरा या पीला, फन फैलाने पर पीछे ओम या चश्मा जैसा निशान होता है, कोबरा के काटने पर दर्द, सूजन, उल्टी, सांस लेने में परेशानी तथा मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। रसेल वाइपर का रंग पीले-भूरे रंग पर गहरे गोल निशान होते है, रसेल वाइपर के काटने पर तेज दर्द, सूजन, रक्तस्राव और उल्टी की समस्या हो सकती है, वहीं सॉ-स्केल्ड वाइपर का रंग भूरा या ग्रे, जिगजैग पैटर्न होते है, इसके काटने पर तेज दर्द, सूजन और रक्तस्राव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। सर्पदंश के बाद शरीर पर दो छेद जैसे निशान दिखाई देना, काटे गए स्थान पर दर्द और सूजन, उल्टी, चक्कर या बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, रक्तस्राव की समस्या तथा शरीर के किसी हिस्से में लकवा या सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।

उन्होने लोगों से अपील की है कि खेत, जंगल अथवा घास-झाड़ियों वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें। घर के आसपास झाड़ियों और घास की नियमित सफाई रखें। खेत या जंगल में जाते समय जूते तथा फुल पैंट पहनें और रात में टॉर्च अथवा लालटेन का प्रयोग करें। विशेषकर बारिश के दौरान दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी गई है। घर में चूहों की रोकथाम एवं सफाई पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है, क्योंकि सांप चूहों का शिकार करने के लिए घरों के आसपास आ सकते हैं।

सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें, क्योंकि घबराहट और अधिक गतिविधि से विष के फैलने की गति बढ़ सकती है। काटे गए अंग को हिलने न दें और उसे स्थिर रखें। काटे गए स्थान को साफ पानी और साबुन से धोया जा सकता है तथा पीड़ित को बिना देरी किए सीधे अस्पताल ले जाएं। यदि संभव हो तो सांप का रंग और आकार याद रखें, लेकिन सांप को पकड़ने अथवा उसके पीछे जाने का प्रयास बिल्कुल न करें। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक अथवा देसी उपचार के चक्कर में समय बर्बाद न करें। काटे गए अंग को चाकू से काटना, घाव को चूसना अथवा कसकर बांधना नुकसानदायक हो सकता है। पीड़ित व्यक्ति को चलाने या दौड़ाने के बजाय यथासंभव शांत एवं स्थिर रखते हुए अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

उन्होंने बताया है कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों में पॉलीवैलेन्ट एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है, जो ‘बिग फोर’ जहरीले सांपों के विष के विरुद्ध प्रभावी है। सर्पदंश के बाद जितनी जल्दी एंटीवेनम दिया जाता है, पीड़ित के बचने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। आपातकालीन स्थिति में महत्वपूर्ण नम्बर एम्बुलेंस के लिए 108ध्102, आपातकालीन सहायता के लिए 112 तथा अन्य आवश्यक सहायता के लिए 1077 पर संपर्क किया जा सकता है।

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