लखनऊ। राजधानी में जैसे ही आसमान से पानी की कुछ बूंदें बरसती हैं, नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों की कलई खुलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही नजारा लखनऊ पूर्व विधानसभा के इंदिरानगर इलाके में देखने को मिला। जलभराव, बजाते नाले और सड़कों पर फैले कचरे से बेहाल जनता का जब गुस्सा फूटने लगा, तो विधायक ओपी श्रीवास्तव को मजबूरन बारिश के बीच ही हाथ में छाता थामकर सड़कों पर ऑन-ग्राउंड एक्शन का मुआयना करने उतरना पड़ा।
वर्षों से टैक्स भर रही इंदिरानगर की जनता ने जब विधायक जी को अपने बीच देखा, तो शिकायतों का गुबार फूट पड़ा। लोगों का सबसे बड़ा दर्द जलनिकासी की वो अनोखी श्इंजीनियरिंगश् रही, जिसमें नाला सड़क से भी ऊँचा बना दिया गया है। नतीजा यह है कि बारिश का पानी नालों में जाने के बजाय लोगों के ड्राइंग रूम और रसोई तक पहुंच रहा है। कागजों पर करोड़ों का ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त बताने वाला प्रशासन धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ है।
केवल जलभराव ही नहीं, बल्कि श्क्लीन लखनऊश् के दावों की हवा निकालता डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी क्षेत्र की बड़ी समस्या बना हुआ है। स्थानीय निवासियों ने विधायक को बताया कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां किसी ईद के चाँद की तरह कभी-कभार ही दर्शन देती हैं, जिससे सड़कों पर कचरे के ढेर लग रहे हैं।
अमूमन वातानुकूलित कमरों में बैठकर श्सब चंगा सीश् का रिपोर्ट कार्ड देखने वाले प्रशासनिक अफसरकृजोनल अधिकारी विकास सिंह, जोनल सेनेटरी अफसर रूपेंद्र भास्कर और जलकल के अधिशासी अभियंता ओम प्रकाश रामकृभी विधायक जी के पीछे-पीछे पानी भरे गड्डों को नापते नजर आए। विधायक ने मौके पर ही आलोक श्रीवास्तव को सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने का फरमान सुना दिया। हालांकि, जनता बखूबी जानती है कि फाइल पर प्रस्ताव बनने और सड़क पर डामर बिछने के बीच का सफर अक्सर सालों लंबा होता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या हर बार जलभराव और गंदगी के नरक को झेलने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? विधायक और अफसरों का यह श्मानसून वॉकश् महज एक फोतो शॉप और आश्वासनों का पुलिंदा बनकर रह जाएगा या फिर इंदिरानगर की सड़कों और नालों की तस्वीर सच में बदलेगी ? फिलहाल तो जनता फिर से अगली बारिश और फिर से मिलने वाले नए आश्वासनों के इंतजार में है।
