लखनऊ। बाहुबली पूर्व सांसद दिवंगत मुख्तार अंसारी के परिवार को अदालत से एक तरफ बड़ी कानूनी राहत मिली, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा ढीलापन सामने आया जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लखनऊ के अति-सुरक्षित इलाके डालीबाग स्थित अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की कोठी की सील जब कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद खोली गई, तो जश्न का माहौल पलभर में सन्नाटे और हैरानी में बदल गया। नगर निगम की कस्टडी में दर्जनों तालों के बीच रखी इस कोठी के अंदर से लाखों रुपये के कीमती जेवर और अन्य सामान गायब हो चुका था।
गैंगस्टर एक्ट के तहत गाजीपुर प्रशासन द्वारा सील की गई डालीबाग स्थित इस बहुचर्चित कोठी को कानूनी प्रक्रिया के तहत लखनऊ नगर आयुक्त की निगरानी में सौंपा गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने इस संपत्ति को अफजाल अंसारी के परिवार को वापस सौंपने का फरमान जारी किया। आदेश के अनुपालन में नगर निगम की टीम कागजी कार्यवाही पूरी कर चाबियां सौंपने पहुंची। सांसद अफजाल अंसारी अपनी बेटियों के साथ कानूनी कब्जा लेने पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही कोठी के दरवाजे खुले, भीतर का नजारा देख सब सन्न रह गए।
कोठी के भीतर दाखिल होते ही पता चला कि अलमारियों और दराजों के ताले टूटे पड़े थे। अफजाल अंसारी के अनुसार, अलमारियों में उनकी बेटी की शादी के लिए संभालकर रखे गए लाखों रुपये के कीमती सोने-चांदी के जेवर और अन्य वैल्युएबल सामान पूरी तरह नदारद था। हैरत की बात यह है कि जिस बिल्डिंग की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा खुद नगर निगम और स्थानीय पुलिस के कंधों पर था, वहां इतनी बड़ी चोरी हो गई और जिम्मेदारों को कानों-कान खबर तक नहीं हुई।
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस कोठी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली हो। करीब 4 साल पहले जब गाजीपुर प्रशासन ने इसे सील किया था, उसके कुछ ही दिनों बाद भी यहां चोरी की वारदात हुई थी। उस वक्त भी पुलिस-प्रशासन को आगाह किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने न तो कोई कड़ा सबक लिया और न ही कोठी की मुकम्मल सुरक्षा का कोई ठोस इंतजाम किया। श्सरकारी कस्टडीश् के नाम पर कोठी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया, जिसका फायदा उठाकर चोर लाखों का माल साफ कर गए।
प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल उठना लाजमी है कि जब कोठी आधिकारिक रूप से नगर आयुक्त की निगरानी में थी, तो उसकी सुरक्षा में इतनी घातक चूक कैसे हुई ? जो संपत्ति प्रशासनिक सील के तहत बंद थी, उसमें घुसकर अलमारियों के लॉक तोड़ना बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत या घोर लापरवाही के कैसे संभव है ? और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अफजाल अंसारी द्वारा इस दुस्साहसिक चोरी की शिकायत दिए जाने पर पुलिस निष्पक्षता से एफआईआर दर्ज करेगी, या प्रशासनिक नाकामी को छुपाने के लिए मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश होगी ?
अदालत से राहत पाकर अपनी संपत्ति पर वापस लौटे परिवार के लिए यह दिन एक कड़वा अनुभव साबित हुआ। इस पूरी घटना ने साबित कर दिया है कि जब बात सरकारी कस्टडी में रखी संपत्तियों की सुरक्षा की आती है तो जिम्मेदार तंत्र किस कदर आंखें मूंदकर बैठ जाता है।
