भांवरकोल/गाजीपुर। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को वामन जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। महिलाओं ने व्रत रखकर भगवान वामन की पूजा-अर्चना की और कथा श्रवण कर परिवार के सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के वामन अवतार की जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वामन भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवें अवतार हैं। यह पर्व धर्म, दान और विनम्रता का संदेश देता है।
क्षेत्र के सियाड़ी गांव निवासी पंडित हृषिकेश तिवारी ने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान वामन के अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने बटुक ब्राह्मण के रूप में वामन अवतार लिया। उस समय दैत्यराज महाबली देवताओं को पराजित कर तीनों लोकों पर अपना अधिकार स्थापित कर चुके थे और यज्ञ कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि भगवान वामन यज्ञ स्थल पर पहुंचे और राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन राजा बलि अपने वचन से पीछे नहीं हटे। उन्होंने गंगाजल हाथ में लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया।
संकल्प पूरा होते ही भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना मस्तक भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। बलि की वचनबद्धता से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का अधिपति बना दिया।
पं. तिवारी ने कहा कि वामन अवतार की कथा हमें संदेश देती है कि अहंकार कितना भी बड़ा क्यों न हो, सत्य, धर्म और विनम्रता के सामने उसे झुकना ही पड़ता है। भगवान वामन ने तीन पगों में तीनों लोक नापकर राजा बलि के अहंकार का नाश किया और धर्म की महत्ता स्थापित की।
