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बलियाः आपदा में अपनों के साथ खड़ा रहना ही मेरा संकल्प - सूर्यभान सिंह


  • डेढ़ दशक से बिना पद के निरंतर सेवा, बाढ़ हो या कोई संकटकृपीड़ितों तक मदद पहुंचाने में रहते हैं आगे
  • बैरिया विधानसभा के लोगों को परिवार मानकर निस्वार्थ सेवा का दावा, धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर लेते हैं हिस्सा


बलिया। बैरिया विधानसभा क्षेत्र में जब भी प्राकृतिक आपदा या कोई बड़ा संकट आता है, पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने वाले लोगों में समाजसेवी सूर्यभान सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। करीब डेढ़ दशक से बिना किसी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक पद पर रहे वह क्षेत्र के जरूरतमंदों की सहायता में सक्रिय रहने का दावा करते हैं। बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान सूर्यभान सिंह ने कहा कि पद और प्रतिष्ठा से अधिक उनके लिए क्षेत्र के लोगों का सुख-दुख महत्वपूर्ण है। विधानसभा क्षेत्र के लोगों को वह अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और किसी भी आपदा में उनके साथ खड़ा रहना अपना सामाजिक दायित्व समझते हैं।

सूर्यभान सिंह ने कहा कि बाढ़, कटाव, अग्निकांड अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ित परिवारों की जरूरत के अनुसार सहायता पहुंचाने का प्रयास लगातार किया जाता रहा है। उनका कहना था कि सेवा का उद्देश्य किसी पद या राजनीतिक लाभ की अपेक्षा नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में अपने लोगों के काम आना है। उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार पर विपत्ति आती है तो उस समय उसके साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों में क्षेत्र में आई विभिन्न आपदाओं के दौरान अपनी क्षमता के अनुसार लोगों तक राहत और सहायता पहुंचाने का प्रयास किया। उनका संकल्प है कि भविष्य में भी बैरिया विधानसभा के किसी गांव में आपदा आती है तो वह पीड़ितों के बीच पहुंचकर हरसंभव सहयोग करेंगे।

सूर्यभान सिंह ने कहा कि सामाजिक सरोकार केवल आपदा के समय तक सीमित नहीं हैं। क्षेत्र में होने वाले पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों, प्रतियोगिताओं और सामाजिक कार्यक्रमों में भी वह अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। उनका कहना था कि धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम हैं और इनमें लोगों की भागीदारी से आपसी भाईचारा मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि बैरिया विधानसभा के लोगों से उनका संबंध केवल राजनीतिक या सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना ही उनकी प्राथमिकता रही है। उन्होंने भविष्य में भी इसी भावना के साथ समाजसेवा जारी रखने की बात कही।

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