किच्छा। नगर पालिका चुनाव के मतदान के अंतिम दौर में नवीन मंडी स्थित स्ट्रांग रूम के बाहर हुआ विवाद अब महज निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने के आरोप के बाद किच्छा की सियासत में एक बार फिर बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच करीब 15 वर्ष पुराने भदईपुरा रामलीला मैदान विवाद के वीडियो और घटनाक्रम भी सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में आ गए हैं।
मौजूदा नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के समर्थन में विधायक तिलकराज बेहड़ सक्रिय रहे, जबकि भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोरा के चुनाव अभियान में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की प्रमुख भूमिका रही। ऐसे में निकाय चुनाव को दोनों खेमों के लिए स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।
मतदान के दौरान नवीन मंडी स्थित स्ट्रांग रूम के बाहर पर्दे लगाए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। विधायक तिलकराज बेहड़ ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। इसी दौरान पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
इसी दौरान बेहड़ को शुक्ला के साथ आए एक समर्थक द्वारा थप्पड़ मारे जाने का आरोप सामने आया। घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया। मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने आरोप लगाए हैं।
बेहड़ ने इस मामले को विधानसभा की विशेषाधिकार हनन समिति के समक्ष उठाने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने घटना को राजनीतिक मर्यादा से जोड़ते हुए विरोध का रुख अपनाया है। दूसरी ओर भाजपा की ओर से भी बेहड़ और उनके समर्थकों पर शुक्ला परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए हैं।
घटना के बाद किच्छा में राजनीतिक बहस का केंद्र बदल गया है। चुनाव से पहले जहां चर्चा स्थानीय समस्याओं, विकास और प्रत्याशियों के बीच मुकाबले तक सीमित थी, वहीं अब स्ट्रांग रूम विवाद, राजनीतिक मर्यादा और दोनों नेताओं के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी चर्चा का हिस्सा बन गई है।
हालांकि इस घटनाक्रम का वास्तविक चुनावी असर क्या होगा, इसका आकलन मतगणना के परिणाम के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल दोनों दल अपने-अपने तरीके से घटना को जनता के बीच रखने में जुटे हैं।
मौजूदा विवाद के बीच वर्ष 2011 का भदईपुरा रामलीला मैदान प्रकरण भी फिर चर्चा में आ गया है। उस समय रुद्रपुर के किच्छा रोड स्थित भदईपुरा क्षेत्र में रामलीला मैदान के प्रबंधन और आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन विधायक तिलकराज बेहड़ और भाजपा नेता राजेश शुक्ला आमने-सामने आ गए थे।
समकालीन समाचार रिपोर्टों के अनुसार विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और पथराव की स्थिति बनी थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। इसी घटनाक्रम के दौरान बेहड़ द्वारा राजेश शुक्ला को थप्पड़ मारे जाने का उल्लेख बाद की रिपोर्टों में मिलता है।
हालांकि उस दौर के कुछ वीडियो अब सोशल मीडिया पर फिर प्रसारित हो रहे हैं, लेकिन वायरल वीडियो की तारीख, संदर्भ और पूरी रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उनके आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भदईपुरा रामलीला मैदान का विवाद राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रहा था। मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर तक भी पहुंचा था। अप्रैल 2011 में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में परगना मजिस्ट्रेट द्वारा विवादित रामलीला मैदान के संबंध में पुरानी कमेटी के पक्ष में फैसला दिए जाने का उल्लेख किया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, साक्ष्यों और जांच के आधार पर श्री सनातन रामलीला कमेटी भदईपुरा द्वारा रामलीला मंचन किए जाने की बात सामने आई थी। विवादित भूमि पर स्वामित्व संबंधी निर्णय होने तक नवनिर्माण पर रोक का भी उल्लेख किया गया था।
तिलकराज बेहड़ और राजेश शुक्ला के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता करीब डेढ़ दशक से किच्छा की राजनीति का प्रमुख हिस्सा रही है। वर्ष 2011 में दोनों नेताओं का टकराव रामलीला मैदान विवाद को लेकर सामने आया था, जबकि 2026 में विवाद चुनावी प्रक्रिया और स्ट्रांग रूम की व्यवस्था को लेकर सामने आया परिस्थितियां अलग होने के बावजूद दोनों घटनाओं में दोनों नेताओं का आमना-सामना होने के कारण पुराना घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
किच्छा विधानसभा की राजनीति में दोनों नेताओं की भूमिका को देखते हुए मौजूदा नगर पालिका चुनाव का महत्व भी बढ़ जाता है। राजेश शुक्ला 2012 और 2017 में भाजपा के टिकट पर किच्छा विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तिलकराज बेहड़ ने उन्हें पराजित किया था। 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी औपचारिक प्रत्याशी तय नहीं हुए हैं, लेकिन मौजूदा विधायक बेहड़ और पूर्व विधायक शुक्ला की सक्रियता के चलते किच्छा की राजनीति में दोनों खेमों की गतिविधियां राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। नगर पालिका चुनाव का परिणाम इसलिए केवल स्थानीय निकाय की सत्ता का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों दलों का स्थानीय संगठन और समर्थक आधार किस स्थिति में है। फिलहाल स्ट्रांग रूम के बाहर हुआ विवाद और उसके बाद सामने आए पुराने वीडियो ने किच्छा की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। करीब 15 साल पुराने राजनीतिक टकराव की यादें ताजा होने के साथ ही यह विवाद अब निकाय चुनाव से आगे की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।।
