लखनऊ। राजधानी में प्रशासनिक नाकामी और भ्रष्टाचार का खौफनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभी हाल ही में आईटी चैराहे और डालीबाग में हुई घटनाओं से अफसरों की नींद खुली भी नहीं थी कि अब जोन 7 के इंदिरा नगर से एक और जानलेवा लापरवाही की खबर सामने आई है। शहीद भगत सिंह वार्ड-13 (प्रथम) के महामाया नगर की मुख्य सड़क के बीचों-बीच एक खतरनाक गड्ढा उभर आया है, जिसके नीचे की पूरी जमीन खोखली हो चुकी है।
यह कोई मामूली गड्ढा नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता श्डेथ ट्रैपश् है। सड़क ऊपर से जितनी पतली दिख रही है, नीचे से उतनी ही तेजी से ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। किसी भी वक्त पूरी सड़क भरभराकर धंस सकती है और कोई बड़ा हादसा दर्जनों जिंदगियों को निगल सकता है।
सबसे ज्यादा संवेदनशील और खौफनाक बात यह है कि इसी मुख्य मार्ग पर चंद्रशेखर स्कूल, किड्स लर्निंग वर्ल्ड और डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क मौजूद हैं। सुबह से शाम तक इस रास्ते पर नन्हे-मुन्ने स्कूली बच्चों, उनके अभिभावकों और स्थानीय निवासियों का तांता लगा रहता है। जिस रास्ते पर बच्चों के सुरक्षित बचपन के कदम पड़ने चाहिए, वहां नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के चलते श्मौत का कुआंश् खोदकर छोड़ दिया गया है।
सड़क के नीचे का हिस्सा पूरी तरह खोखला हो चुका है, लेकिन क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और नगर निगम के अफसरों की आंखों पर मानो पट्टी बंधी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे और चीख-पुकार का इंतजार कर रहा है विभाग ?अगर कोई स्कूली बच्चा या राहगीर इस खोखली सड़क में धंस गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? विकास के नाम पर बजने वाले करोड़ों रुपये के ढोल आखिर धरातल पर धंस क्यों रहे हैं ?
क्षेत्रीय निवासियों में इस खतरनाक गड्ढे को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों की स्पष्ट मांग है कि संबंधित विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि तुरंत कुंभकर्णी नींद से जागें। कागजी खानापूर्ति छोड़कर तत्काल मौके का निरीक्षण किया जाए और प्राथमिकता के आधार पर इस खोखली सड़क की पक्की मरम्मत कराई जाए।
अगर समय रहते इस श्सुरंगश्नुमा गड्ढे को नहीं भरा गया, तो लखनऊ की सड़कों पर प्रशासनिक नाकामी की एक और खूनी दास्तान लिखी जाना तय है।
