लखनऊ।राजधानी में कानून का राज और आबकारी विभाग के सख्त नियमों का सच देखना हो, तो थाना चैक अंतर्गत कंचन मार्केट चले आइए। यहां समय सीमा, कायदे-कानून और सरकारी आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की तथाकथित श्विशेष मेहरबानीश् के चलते कंचन मार्केट के बाहर सुबह की पहली किरण के साथ ही देशी शराब का अवैध कारोबार पूरी रफ्तार से दौड़ने लगता है।
चैक चैकी के ठीक नाक के नीचे चल रहे इस खेल का तरीका भी बेहद नायाब और दुस्साहसिक है। शराब की दुकान के बाहर लगे अवैध टट्टर में बाकायदा एक श्विशेष छेदश् बनाया गया है। आबकारी विभाग द्वारा तय किए गए सरकारी समय से घंटों पहले ही इस छेद के जरिए देशी शराब के पौवे और बोतलें धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। आलम यह है कि जिस वक्त शहर के आम नागरिक और छात्र अपनी सुबह की शुरुआत कर रहे होते हैं, ठीक उसी वक्त कंचन मार्केट के बाहर श्पियक्कड़ोंश् की लंबी-लंबी लाइनें सज जाती हैं।
स्थानीय व्यापारियों और कंचन मार्केट के निवासियों का कहना है कि सुबह-सुबह लगने वाले इस मजमे से इलाके का माहौल खराब हो रहा है। महिलाएं, बच्चे और राहगीर यहां से गुजरने में कतराते हैं। मार्केट वासियों ने इस अवैध बिक्री और खुलेआम चल रहे धांधले की शिकायत कई बार स्थानीय चैक पुलिस से की। लेकिन हर बार आश्वासन का ढांचा खड़ा कर दिया गया और धरातल पर कार्रवाई के नाम पर केवल श्सन्नाटाश् मिला।
प्रशासनिक और आबकारी साठगांठ पर तीखे सवाल यह है कि क्या आबकारी विभाग के अधिकारियों को कंचन मार्केट के बाहर बना यह अवैध टट्टर और उससे होती समय से पहले बिक्री नजर नहीं आती ? जिस चैकी के अंतर्गत यह पूरा खेल चल रहा है, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों की इस चुप्पी को श्लापरवाहीश् माना जाए या श्मौन सहमतिश्? अगर कोई आम नागरिक जरा सा नियम तोड़े तो चालान और पुलिसिया कार्रवाई तय है, लेकिन समय से पहले अवैध तरीके से शराब बेचने वालों पर मेहरबानी का यह श्विशेष प्रोटोकॉलश् क्यों?
स्थानीय लोगों में इस खुलेआम चल रही गुंडागर्दी और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागकर भ्रष्ट साठगांठ पर कोई कड़ा एक्शन लेते हैं, या कंचन मार्केट में सुबह-सुबह शराब की श्होम डिलीवरीश् का यह सिलसिला यूं ही बेखौफ जारी रहेगा।
