लखनऊ। नगर निगम का ‘मास्टरस्ट्रोक’ देखना हो तो गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-1 चले आइए। स्वच्छ भारत मिशन और श्सेफ सिटीश् योजना के तहत महिलाओं की सुविधा के लिए जिस श्पिंक टॉयलेटश् की नींव रखी गई थी, वहां अब स्वच्छता की नहीं, बल्कि व्यापार की बहार है!
कागजों और बोर्ड पर तो यह महिलाओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय है, लेकिन धरातल पर यह एक चलता-फिरता जनरल स्टोर बन चुका है। अब इसे नगर निगम की ‘मल्टीटास्किंग’ कहें या घोर लापरवाहीकृजिस परिसर में सैनिटरी पैड या साबुन होना चाहिए था, वहां दाल-चावल, बिस्किट, चिप्स और पानी की बोतलें सजाकर बेची जा रही हैं।
पिंक टॉयलेट के मुख्य द्वार और परिसर को ही जनरल स्टोर का रूप दे दिया गया है। ऐसा लगता है कि नगर निगम स्वच्छता के साथ-साथ श्आत्मनिर्भर भारतश् का नया व्यावसायिक मॉडल प्रयोग कर रहा है। महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल का दावा करने वाले इस परिसर के बाहर खाली बोतलें, बिखरा कचरा और गंदगी फैली हुई है। स्थानीय नागरिक सोच में पड़े हैं कि क्या सार्वजनिक शौचालय के परिसर में निजी दुकान चलाने की कोई गुप्त सरकारी नीति आई है ? अगर नहीं, तो किस अधिकारी की मेहरबानी और किस सुविधा शुल्क के आधार पर यह व्यापार फल-फूल रहा है ?
लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके बोर्ड तो श्पिंकश् टांग दिया गया, लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली ने इस योजना का रंग पूरी तरह से उड़ा दिया है। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित सुविधाएं देना था, लेकिन लखनऊ नगर निगम ने इसे ‘मल्टीपर्पस मॉल’ की शक्ल दे दी है।
अब सवाल यह है कि क्या कुंभकर्णी नींद में सो रहा नगर निगम इस ष्पिंक जनरल स्टोरष् पर संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई करेगा, या फिर अगली बार यहां चाय-नाश्ते का स्टॉल खोलने की भी मौन अनुमति दे दी जाएगी ? जनता जवाब का इंतजार कर रही है!
