लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अफसरों को आराम से कुंभकर्णी नींद सोने की पुरानी आदत है, लेकिन 11 सितंबर 2026 को लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में जो ड्रामा हुआ, उसने कई कुर्सियों के पाए हिला दिए। उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल जब 8 सूत्रीय मांगों का पुलिंदा लेकर पहुंचा, तो राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष श्री भगवत प्रसाद मखवाना और सदस्य श्रीमती सुषमा गोडियाल ने अधिकारियों की क्लास लगाने में जरा भी देर नहीं की।
बैठक में विभागों के बड़े-बड़े साहबान एसी की ठंडी हवा खाने बैठे थे, पर माहौल अचानक गर्म हो गया। अध्यक्ष जी ने सीधे शब्दों में फरमान सुना दियाकृफाईलों को दबाकर बैठना बंद कीजिए और तुरंत शासनादेश जारी कीजिए !
इतना ही नहीं, कागजी वादों से ऊब चुके आयोग ने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेताया ष्सफाई कर्मचारियों का शोषण अगर बंद नहीं हुआ, तो अगली बार नोटिस नहीं, सीधे आपके नाम की एफआईआर कटेगी। उत्तर प्रदेश सरकार को लिखकर ऐसा सबक सिखाएंगे कि आगे कोई ढिलाई याद भी नहीं आएगी।ष्
मतलब साफ हैकृअब तक जो अधिकारी कर्मचारियों की शिकायतों को श्रद्दी की टोकरीश् के हवाले करते थे, अब उन्हें अपनी फाइलें दुरुस्त रखने की चिंता सताने लगी है।
आयोग ने संघ को सीधा भरोसा दिलाया है कि पूरे प्रदेश में कहीं भी कोई अधिकारी अपनी हनक दिखाए, तो सीधे दिल्लीध्आयोग के किवाड़ खटखटाएं, इलाज तुरंत होगा।
इस पूरी श्सर्जिकल स्ट्राइकश् वाले माहौल में संघ के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश चैधरी की अगुवाई में काकोरी से राजू धानुक और सुपरवाइजर ओमप्रकाश, शामली-मुजफ्फरनगर से अस्वनी वाल्मीकि, मलीहाबाद से राम कुमार, मदन उपाध्याय व रवि वाल्मीकि, और लखनऊ से रज्जन कोतवाल, संजय पंडित, राजू चैधरी तथा गौतम धानुक अपनी पूरी फौज के साथ डटे रहे।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि अफसरों को आयोग का यह श्सिरदर्दश् कितने दिन याद रहता है या वे फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लौटते हैं!
