लखनऊ/प्रतापगढ़। लंबे समय से रिक्त चल रहे उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग का आखिरकार राज्य सरकार द्वारा गठन कर दिया गया है। आयोग के गठन में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिकाकर्ता शम्स तबरेज द्वारा दाखिल रिट याचिका संख्या 34ध्2025 पर लगातार पैरवी की जा रही थी।
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ बेंच) ने आयोग के गठन में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए सरकार को आयोग के गठन के लिए अंतिम अवसर भी दिया था। 20 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव संयुक्ता समद्दार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
इसके बाद 18 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आयोग के गठन के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया था। लगातार हुई सुनवाई, न्यायालय की सख्ती और सरकार को दिए गए अंतिम अवसर के बाद अब राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग का नए सिरे से गठन कर दिया है।
जारी आदेश के अनुसार पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि आयोग में अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है।
याचिकाकर्ता शम्स तबरेज ने कहा कि लंबे समय से संवैधानिक संस्था के रिक्त रहने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे थे। आयोग के गठन से इस संस्था को पुनः सक्रिय रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि रिट याचिका में लगातार की गई प्रभावी पैरवी और उच्च न्यायालय की निगरानी के परिणामस्वरूप राज्य सरकार को आयोग के गठन की दिशा में कदम उठाना पड़ा। आयोग के गठन को उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की सक्रियता की बड़ी उपलब्धि बताया।
