लखनऊ। राजधानी को कागजों पर इतना श्स्मार्टश् बना दिया गया है कि बेचारी स्ट्रीट लाइटें भी शर्म के मारे बंद पड़ी हैं! कैसरबाग के आनंद चैराहे पर बुधवार रात हुआ कार हादसा नगर निगम के इन्हीं बड़े-बड़े दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। शहर को नंबर-वन बनाने का ढिंढोरा तो खूब पीटा जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि नवाबों के शहर की मुख्य सड़कें रात होते ही किसी भुतिया गली जैसी नजर आने लगती हैं।
नगर निगम की दूरदर्शिता की जितनी तारीफ की जाए कम है! उन्होंने सड़कों पर बिना रेडियम और रिफ्लेक्टर के काले-कलूटे डिवाइडर इस तरह सजा रखे हैं, मानो राहगीरों के लिए कोई श्सरप्राइज टेस्टश् रखा गया हो। रात के सन्नाटे में ये डिवाइडर चालकों को तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कार सीधे इनमें जा न घुसे। बुधवार को भी यही हुआकृएक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई, जिससे परिवार के लोग घायल हो गए और गाड़ी का अगुआ हिस्सा श्स्मार्ट व्यवस्थाश् की भेंट चढ़ गया।
हादसे के बाद कैसरबाग पुलिस ने तो मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल भिजवाया और ट्रैफिक खुलवाया, जिसकी स्थानीय लोगों ने तारीफ भी की। लेकिन असली तारीफ के हकदार तो नगर निगम के वो जिम्मेदार अफसर हैं, जो विधानसभा जैसे वीआईपी इलाके के पास भी अंधेरा कायम रखे हुए हैं। शिकायतें भले ही ढेरों आई हों, पर साहब लोगों की आंखें तब तक नहीं खुलतीं जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी के बजट की रोशनी सिर्फ अफसरों की फाइलों और विज्ञापनों में ही चमकेगी या कभी आम जनता की सड़कों तक भी पहुंचेगी? देखना यह है कि महकमा इस हादसे के बाद जागता है या फिर किसी और के घायल होने का इंतजार करेगा!
