लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मातृ मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब यदि किसी प्रसूता की मौत होती है, तो उसका ऑडिट घटना के 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों और जिला स्तर के स्वास्थ्य प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रसूता की मृत्यु होने पर 24 घंटे के भीतर श्मैटरनल डेथ ऑडिटश् की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का तत्काल पता लगाया जा सके। समीक्षा के दौरान जो भी कारण (जैसे कि एम्बुलेंस में देरी, रक्त की अनुपलब्धता, डॉक्टरों की लापरवाही या समय पर रैफर न होना) सामने आएंगे, उन पर संबंधित जिले में तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिन जिलों में बार-बार मातृ मृत्यु के मामले दर्ज हो रहे हैं, उन्हें श्हाई-फोकसश् श्रेणी में रखा जाएगा। वहां की स्वास्थ्य सुविधाओं, संसाधनों और कर्मचारियों की तैनाती का अलग से निरीक्षण किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि त्वरित ऑडिट से न केवल जवाबदेही तय होगी, बल्कि भविष्य में होने वाली ऐसी अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में समय रहते सुधार किया जा सकेगा। अक्सर ऑडिट में होने वाली देरी के कारण लापरवाही के साक्ष्य मिट जाते हैं या सुधारात्मक कदम उठाने में देर हो जाती है।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (ब्डव्) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में इस व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं।
