लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। तीन बड़े चेहरों की कांग्रेस में संभावित वापसी और एंट्री की खबरों ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को गरमा दिया है।
कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहीं रीता बहुगुणा जोशी के दोबारा पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बहन रीता बहुगुणा का अपना एक बड़ा राजनीतिक जनाधार है। बीजेपी में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उपेक्षा का शिकार होने के बाद अब उनके पुराने श्घरश् लौटने के कयास लगाए जा रहे हैं।
रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह की भी कांग्रेस में वापसी की राह तलाशने की खबरें हैं। 2021 में कांग्रेस छोड़ 2022 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली अदिति सिंह के पिता स्वर्गीय अखिलेश सिंह रायबरेली के कद्दावर नेता रहे हैं। रायबरेली में राहुल गांधी की बड़ी जीत के बाद से बदले सियासी माहौल में अदिति सिंह की वापसी कांग्रेस को अपने गढ़ में और मजबूती दे सकती है।
मोहनलालगंज से पूर्व सांसद और मोदी सरकार में मंत्री रहे कौशल किशोर की भी कांग्रेस में जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल के दिनों में बीजेपी संगठन द्वारा खुद को दरकिनार किए जाने का दर्द जताने और श्आत्मसम्मान रैलीश् के जरिए तेवर दिखाने के बाद उनके इस कदम को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इन तीन प्रमुख नेताओं के रुख में आया बदलाव भारतीय जनता पार्टी के भीतर उपजे असंतोष और कांग्रेस के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है. 2024 में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रति विश्वास बहाल किया है। बीजेपी में गैर-मूल कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार किए जाने की कसक अब खुलकर बाहर आ रही है। ब्राह्मण चेहरा (रीता बहुगुणा), राजपूत व युवा चेहरा (अदिति सिंह) और बड़ा दलित चेहरा (कौशल किशोर) यदि एक साथ कांग्रेस के पाले में आते हैं, तो यह यूपी में कांग्रेस को सभी वर्गों में एक नई धार देगा।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश की राजनीति की दिशा तय करता है। अगर यह असंतोष श्घर वापसीश् की लहर में तब्दील होता है, तो 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से शुरू होने वाली यह हवा 2029 की दिल्ली की राह को भी प्रभावित कर सकती है।
