प्रतापगढः कब जिंदगी में लोग काम के......! पूरे दूधी के सुखसागर धाम में कवि सम्मेलन में साहित्य की बही रसधार
September 20, 2026
लालगंज/ प्रतापगढ। क्षेत्र के रामगंज पूरे दूधी स्थित सुख सागर मैरिज हाल में सुख सागर परोपकार सेवा ट्रस्ट द्वारा गणेश उत्सव के अवसर पर विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के नामचीन कवियों ने विभिन्न विधाओं की रचनाएं पढ़कर लोगों को राष्ट्र भक्ति प्रेम सद्भाव का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गजेंद्र सिंह विकट की गणेश वंदना से हुई। गजलकार डॉ चंद्रकांत त्रिपाठी शाश्वत ने पढ़ा- कब जिंदगी में लोग काम के मिले, तुम भी मिले तो मुझे फकत नाम के मिले, को लोगों ने सराहा। हरिवंश शुक्ल शौर्य ने पड़ोसी देशों को सचेत करते हुए अपने राष्ट्रभक्ति की रचना सोवत शेर जगावा जी, इतिहास का फिर दोहरावा जी से वाहवाही हासिल की। गजेंद्र सिंह विकट ने बेटियों की पर आधारित रचना बेटियां हैं हमारी लहर की तरह, इनको सम्भालो जिगर की तरह से नारी शक्ति का वंदन किया। अनूप त्रिपाठी ने प्रेम सद्भाव की पंक्तियां राम समझ रहमान समझ ले धर्म समझ ईमान समझ ले ,मंदिर कैसा मस्जिद कैसी ईश्वर का स्थान समझ ले के जरिये लोगों में आपसी प्रेम को बढ़ाने का संदेश दिया । हास्य कवि बिहारी लाल अंबर ने अपने हास्य की रचनाओं से खूब हंसाया गुदगुदाया। नामचीन ओज कवि अंजनी अमोघ ने हम बलिदानियों के उसूल लेकर आयें हैं, पुण्य पद चिन्हों के चरण धूल लेकर आये है ... से देश भक्ति का जज्बा जगाया। आयोजन समिति द्वारा साहित्यकारों तथा विशिष्ट लोगों का सारस्वत सम्मान किया गया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भागवत भूषण आचार्य संतोष जी महाराज ने कहा कि कभी समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का काम करता है वह अपनी लेखनी से आपसी प्रेम सद्भाव को बढ़ाने का भी काम करता है। विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश शुक्ला उसने कहा कि देश की आजादी में साहित्यकारों का विशेष योगदान रहा है। इसके अलावा कैलाश पति मिश्रा ने भी काव्य पाठ किया। सह संयोजक अधिवक्ता मोनू पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया अध्यक्षता संजय शुक्ल संचालन अंजनी अमोघ ने किया। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी महेश रहें। संयोजन देवनारायण मिश्र ने किया। आभार प्रदर्शन सह संयोजक गिरजा शंकर मिश्रा ने जताया । इस अवसर पर रमापति तिवारी अरविंद शुक्ला श्याम नारायण मिश्रा शिव शंकर मिश्र, अनिल तिवारी, नीरज, धीरज, अभिषेक आदि रहे।
