लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बेहद व्यस्त और पॉश इलाके हजरतगंज में स्थित श्हलवासिया मार्केटश् की 4 मंजिला इमारत अब किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। यह इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि इसके अंदर का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर रहा है और बाहरी दीवारों पर भी बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
हलवासिया मार्केट के ग्राउंड फ्लोर पर हलचल से भरा बाजार है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। वहीं, इसकी ऊपरी मंजिलों पर कई व्यावसायिक ऑफिस और प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। हर दिन हजारों की संख्या में व्यापारी, कर्मचारी और आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर इस जर्जर इमारत में आवाजाही करने को मजबूर हैं।
हाल ही में हुई लगातार बारिश के कारण इस इमारत की स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो गई है। दीवारों में नमी और दरारें गहरी होती जा रही हैं। अगर तेज बारिश का दौर यूं ही जारी रहा या फिर हल्का सा भूकंप का झटका आया, तो यह 4 मंजिला जर्जर ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लखनऊ नगर निगम और विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारी किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? हजरतगंज जैसे अति-संवेदनशील और मुख्य इलाके में जर्जर इमारत सरेआम खतरे की घंटी बजा रही है, लेकिन अधिकारियों की नजरें इस ओर नहीं पड़ रही हैं। क्या प्रशासन की नींद तभी खुलेगी जब यहां कोई बड़ा हादसा होगा और बेकसूर लोगों की जान जाएगी?
व्यापारियों और स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन तुरंत इस जर्जर ढांचे की सुध ले और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
