लखनऊ। लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील क्षेत्र के इटौंजा के गोमती नदी के किनारे पड़ने वाले बहादुरपुर, सुल्तानपुर, लासा, अकड़रिया कलां,खुर्द, हीरा पुरवा, दुघरा गांव में बाढ़ में ग्रामीणों को कोई खाद्य सामग्री की सुविधा नहीं मिल रही है। वही बीकेटी एसडीएम आकाश कुमार ने बताया कि प्रशासन द्वारा लगभग 9 नाव का संचालन कराया गया है। नाव चालकों ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि हमारी महानताना बढ़े और प्रतिदिन के हिसाब से रोजाना रुपया दिया जाएं। 8 दिन से लगातार नाव चला रहे हैं, नाव चालकों को खाना देने और रुपए बढ़ाने की मांग की,कहा कि अगर खाना मिलेगा, तो पूरा समय नाव चलाने से ग्रामीणों को दिक्कत नहीं होंगी। सुल्तानपुर के ग्रामीण ओमप्रकाश यादव ने बताया कि बीकेटी प्रशासन द्वारा अभी तक कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि सब्जी की फैसले जैसें, लौकी तुरई भिंडी मूली और धान कि फैसले बाढ के पानी में बर्बाद हो गई है।साथ ही जिंदगी जीने को भी संकट है, हम लोग नमक रोटी किसी तरह खाकर जिंदगी जी रहे हैं, अगर बहादुरपुर सुल्तानपुर गांव की सड़कें पहुंची बना दी जायें, तो शायद पानी गांव में ना घुसे, लेकिन शासन प्रशासन यह काम नहीं करता है और पूर्वजों से बाढ़ देखा आ रहा हूं। नाव के सहारे स्कूली छात्र-छात्राओं को आना जाना हैं। वहीं छात्राओं ने बताया कि घंटो नाव का इंतजार करना पड़ता है। बहादुरपुर सुल्तानपुर की आबादी लगभग 1300 और नाव नव (9) चल चल रही है। लखनऊ डीएम ने निरीक्षण के समय कहा था, दो बड़ी नांव जलेगी, लेकिन अभी तक संचालन नहीं हुआ है। कमलेश ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाएं बहादुरपुर सुल्तानपुर गांव में नहीं पहुंच रही है। अनमोल ने बताया कि नाव बढ़ाई जाए पशुओं के लिए भूसा दिया जाए खाद्य सामग्री वितरण की जायें। जगत नारायण बहादुरपुर ने बताया कि जनता व पशुओं को खाने-पीने की दिक्कत है शौचालय जाने की कोई व्यवस्था नहीं है चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है।
लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब तहसील इटौंजा क्षेत्र के गोमती नदी के किनारे बसे गांव में बाढ़ से फासले वह कुछ किसानों के घर व अनाज बर्बाद हो गए हैं। बता दे कि सुरेंद्र पत्नी पुष्पा देवी निवासी अकड़रिया खुर्द ने बताया कि घर की दीवाल गिर गई अन्य सामान भी बाढ़ में नष्ट हो गया है। पिंटू देवी निवासी खुर्द ने बताया कि घर की दीवाल टीन नष्ट हो गई,जो अनाज गेहूं था वह भी पानी में नष्ट हो गया है खाने का संकट है। खुर्द निवासी संतोष ने मांग की है कि किसानों की फसलों के आकलन के हिसाब से महंगाई को देखते हुए मुआवजा बढ़ाया जायें और फसल मुआवजा की रकम को बढ़ा कर दिया जायें, जिससे कि उनके नुकसान की भरपाई हो सकें। इंद्र प्रसाद निवासी खुर्द ने बताया कि किसानों की सारी फैसले नष्ट हो गई है, गांव के सड़क पर पानी भर गया है,आने-जाने में संकट है और प्रशासन द्वारा कोई सुविधा नहीं मिल रही है। वही बहादुरपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में तीन दिन से बच्चों ने पढ़ाई नहीं की हैं, बच्चों ने आरोप लगाया कि शिक्षक गांव नहीं आते हैं, जबकि बहादुरपुर प्राथमिक विद्यालय में कोई पानी नहीं है परिसर बिल्कुल सूखा पड़ा हुआ है, लेकिन शिक्षा अधिकारी नाव से गांव ना जाना पड़े, इसके लिए स्कूल को हरदा कालोनी में जॉइंट कर दिया है।जिससे कि छोटे बच्चे पढ़ने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ नेता जनता के लिए लगी नावों पर बैठकर अपनी राजनीति चमकाने के लिए किलो 2 किलो 5 किलो सामान लाकर और चार पांच किलो फल लाकर यहां की जनता को लुभाने और उनके इस दर्द में फोटो खींचकर अपनी राजनीति चमकाने वाहवाही लूटने के लिए नाव को लेकर पानी में भ्रमण करते हैं, जिससे कि छात्र-छात्राओं ग्रामीणों को समय पर नाव मुहैया नहीं हो पाती है और वह घंटो सड़क पर बैठकर नाव का इंतजार करते रहते हैं,लेकिन राजनीतिक नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए उनका दुख दर्द ना देख अपने आप को अच्छा साबित करने के चक्कर में ग्रामीण सड़क पर घंटो इंतजार करना पड़ता है। जिससे गांव वालों को बहुत परेशानी होती है और आपस में विवाद उत्पन्न होता है। रामनरेश ने कहा कि नाव चालकों के पास कोई सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम नहीं है और नाव पर ना तो ट्यूब है और ना ही अन्य सुरक्षा इंतजाम है, जिससे कि स्कूली बच्चे महिलाएं सफर करते हैं उनकी सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। नाव चालकों ने सुरक्षा इंतजाम बीकेटी प्रशासन से कई बार कहा, लेकिन यह मांग अभी तक पूरी नहीं की गईं हैं। बाढ़ में खाद्य सामग्री एवं पशुओं के लिए चारा भूसा ना बाटने से ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। महिलाओं का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग व पशु विभाग गांव के अंदर का निरीक्षण तक नहीं किया है, कुछ जगह निरीक्षण किया है कुछ गांव में अभी तक जानवरों की जांच तक नहीं की गई है। वहीं इटौंजा पशु चिकित्सा अधिकारी राहुल दुबे ने बताया कि बहादुरपुर सुल्तानपुर लासा खुर्द गांव में टीम के साथ जाकर पशुओं की जांच की है और आवश्यक दवाई उपलब्ध कराई है। वही एक ग्रामीण ने कहा कि क्षेत्र में बाढ़ आई है फासले नष्ट हो चुकी है रोजगार खत्म हो चुका हैं नमक रोटी खाकर जिंदगी यापन कर रहे हैं जिंदगी संकट से गुजर रही है।
