जामो, अमेठी। थाना जामो की फर्जी फीडिंग के बावजूद पीड़ित को न्याय का रास्ता खुल गया है। माननीय ACJM कोर्ट-16, सुल्तानपुर ने दिनांक 21.08.2026 को केस नं0 9630/26 माता प्रसाद बनाम रमापति पाण्डेय आदि में धारा 173(4) BNSS की अर्जी को धारा 223 BNSS के परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है और 29.09.2026 को बयान के लिए तिथि नियत की है।
अब थानाध्यक्ष जामो विनोद कुमार सिंह सहित 9 मुल्जिमों को कोर्ट में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
पीड़ित माता प्रसाद पाण्डेय, 80 वर्ष, मकान नं0-536 गौरीगंज रोड जामो ने कहा कि पुलिस ने गलत किया, लेकिन कोर्ट के इस आदेश से अब न्याय मिलेगा।
पुलिस ने क्या गलत किया? - 4 ठोस जांच रिपोर्ट छुपाकर की फीडिंग
वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्रा ने कोर्ट में मुकदमा अपराध संख्या 460/16 धारा 419, 420, 467, 468, 471, मुकदमा 592/16 धारा 419, 420, 406, मुकदमा 189/18 धारा 406, NCR 126/18, मुकदमा 41/18 धारा 3/7 ईसी एक्ट की सर्टिफाइड कापियां और SDM, हाईकोर्ट के आदेश दाखिल कर जोरदार बहस की थी।
लेकिन थाने ने CO गौरीगंज के माध्यम से भेजी गई आख्या में 4 बड़े ठोस कागज छुपा लिए -
1. ग्राम पंचायत अधिकारी की रिपोर्ट - मकान नं0-536 में माता प्रसाद पाण्डेय पुत्र स्व० राम दास पाण्डेय का नाम 05.04.1985 से दर्ज है। जमीन 01.01.1983 को लखपति देवी पत्नी मद्दू से 18,000/- में खरीदी है, पुश्तैनी नहीं।
2. सहायक विकास अधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट - ADO पंचायत जामो और गौरीगंज ने माना कि शिव महेश पाण्डेय और रमापति पाण्डेय द्वारा फर्जी आदेश दिखाकर दर्ज कराया गया नाम 03.07.1996 को कट गया था। मकान नं0-536(ख) का आदेश पूरी तरह फर्जी है। परिवार रजिस्टर के क्रमांक 812/802, 867/857, 866/856 पर भी फर्जी परिवार दर्ज हैं। भादर रोड पर विस्फोट से ढहा मकान नंबर 802 शिव महेश का है, 536 नहीं।
3. उप जिलाधिकारी न्यायिक गौरीगंज का आदेश RST/1982/2024 दिनांक 25.10.2025 - SDM ने दोनों जांच रिपोर्ट सही मानी, कहा माता प्रसाद का नाम 1985 से सही है, शिव महेश व परिजनों का नाम फर्जी आदेश से दर्ज था। वाद गलत एवं औचित्य विहीन है, वाद निरस्त, 500 रु हर्जाना और दोबारा वाद लाने पर रोक।
4. हाईकोर्ट का आदेश Writ-C No. 11040/2025 दिनांक 14.11.2025 - जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा अपील वापस लेना सही, सिर्फ जुर्माना हटता है, SDM का फैसला बरकरार।
इन सबको छपाकर थाने ने सिर्फ यह फीडिंग की कि "सिविल विवाद है, उर्मिला देवी के प्रार्थना पत्र पर बंगाली का सामान निकलवाया, सहमति से ताला लगाया।" जबकि हकीकत में बंगाली का कोई सामान नहीं था, पुलिस ने ही वादी का सामान निकलवाया।
किराएदारों का सच जो पुलिस ने छुपाया
FIR 189/18 धारा 406 में अशोक कुमार विश्वास बंगाली का बड़ा भाई अभि कुमार विश्वास फरार है, BW जारी है, वह बेटा नहीं बड़ा भाई है। इन्हें एक कमरा दुकान हेतु और एक दूसरी मंजिल पर रहने को दिया गया था। दूसरा किरायेदार ओमप्रकाश अग्रहरि पशुआहार के नाम पर गैस कालाबाजारी में 41/18 धारा 3/7 ईसी एक्ट में रंगे हाथ पकड़ा गया था। अजन्मे बच्चे के नाम बैनामा 592/16 में चार्ज फ्रेम है, जन्म से पहले ही हिस्सा बढ़ाने के लिए कराया गया था।
अब 9 पर होगी कार्रवाई, पीड़ित को मिलेगा न्याय
27.11.2025 को जब वादी नाती की शादी में व्यस्त था, तब थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह की मौजूदगी में मकान का ताला तोड़कर 7000 नकद, पायल, अंगूठी और कागजात लूटे गए।
वेटे अशोक पाण्डेय ने कोई सहमति नहीं दी थी, थानाध्यक्ष ने खड़े होकर ताला तुड़वाया।
अब कोर्ट ने इसे परिवाद माना है तो थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह सहित 9 मुल्जिम - 1. रमापति पाण्डेय, 2. कमलापति पाण्डेय, 3. शिव महेश पाण्डेय, 4. राधा पति पाण्डेय, 5. मनीष कुमार पाण्डेय, 6. उर्मिला देवी, 7. वंदना देवी, 8. आशीष कुमार पाण्डेय और 9. थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
पीड़ित का कहना है - "पुलिस ने गलत किया, लेकिन कोर्ट ने परिवाद दर्ज कर न्याय का रास्ता खोल दिया है। ग्राम पंचायत अधिकारी, ADO, SDM और हाईकोर्ट के आदेश मेरे पक्ष में हैं। अब 9 मुल्जिमों पर कार्रवाई होगी और बुजुर्ग को न्याय मिलेगा।"
पीड़ित ने मांग की है कि थानाध्यक्ष को हटाकर किसी अन्य जिले के CO से निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सारे तथ्य सामने आ सकें।
