बरखेड़ा। मंगलवार सुबह तेज बारिश के बीच घर लौट रहे एक मजदूर की जिंदगी उस समय दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई, जब सड़क किनारे खड़ा सूखा और जर्जर शीशम का पेड़ अचानक भरभराकर उनके ऊपर जा गिरा। पेड़ के नीचे दबने से 60 वर्षीय मुन्नालाल गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और राहगीरों ने कड़ी मशक्कत कर पेड़ को हटाया और मुन्नालाल को बाहर निकाला। आनन-फानन में उन्हें बरखेड़ा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी इंद्रा देवी और चारों बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के मुताबिक मुन्नालाल परिवार की जिम्मेदारियां मजदूरी करके उठाते थे। अचानक हुई उनकी मौत से परिवार के सामने भावनात्मक दुख के साथ-साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है और हर कोई घटना को लेकर स्तब्ध नजर आया बताया गया कि भोपतपुर गांव निवासी मुन्नालाल मंगलवार सुबह अपने रोजमर्रा के काम से निकले थे। वह बरखेड़ा से भोपतपुर-दौलतपुर पट्टी होते हुए गजरौला मार्ग की ओर गए थे। गांव से आगे नदी के पुल के पास उन्होंने कुछ मछलियां पकड़ीं। इसके बाद मछलियां लेकर वह पैदल ही अपने घर की ओर लौटने लगे। इसी दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के बीच मुन्नालाल सड़क से होकर अपने घर की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे खड़ा पुराना और जर्जर शीशम का पेड़ अचानक गिर पड़ा। इससे पहले कि मुन्नालाल खुद को संभाल पाते, भारी पेड़ उनकी चपेट में आ गया। पेड़ के नीचे दबे मुन्नालाल को देखकर आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। राहगीरों और ग्रामीणों ने तत्काल उनकी मदद के लिए दौड़ लगाई मौके पर जुटे लोगों ने काफी मशक्कत के बाद पेड़ को हटाया और मुन्नालाल को उसके नीचे से बाहर निकाला। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। ग्रामीणों ने बिना देर किए उन्हें अस्पताल पहुंचाया। परिजनों और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बच जाएगी, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
हादसे के बाद ग्रामीणों में सड़क किनारे खड़े सूखे और जर्जर पेड़ों को लेकर नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर ऐसे पेड़ खड़े हैं, जो लंबे समय से सूख चुके हैं और तेज हवा या बारिश के दौरान कभी भी गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। मंगलवार को हुई घटना ने इस खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और संपर्क मार्गों के किनारे खड़े सूखे एवं जर्जर पेड़ों का सर्वे कराया जाए। जिन पेड़ों से राहगीरों की जान को खतरा है, उन्हें चिह्नित कर समय रहते हटाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जर्जर पेड़ों को पहले ही हटाने की कार्रवाई की जाती तो संभव है कि इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश और तेज हवाओं के दौरान पहले से कमजोर हो चुके पेड़ों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों को लेकर संबंधित विभागों को गंभीरता से अभियान चलाने की जरूरत है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों के अनुसार मुन्नालाल लंबे समय से मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। रोज की तरह काम पर निकलना और वापस घर लौटना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। मंगलवार को भी वह घर से निकले थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी। मछली पकड़कर घर लौटते समय हुए हादसे ने परिवार से उसका सहारा छीन लिया। मुन्नालाल की मौत की खबर के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण भी परिवार को ढांढस बंधाते नजर आए। घटना को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतक के परिवार की हरसंभव मदद किए जाने की मांग भी की है बरखेड़ा थाना अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की आवश्यक जांच शुरू कर दी है। हादसे के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है
