प्रतापगढ/बाबागंज। बाबागंज विकासखंड की ग्राम पंचायत भैसाना में विकास के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का मामला गरमा गया है। ग्रामीणों ने प्रधान और पंचायत सचिव पर मिलीभगत कर 16वें वित्त, छठे राज्य वित्त आयोग और मनरेगा की करीब 40 लाख रुपये से अधिक की धनराशि में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक पंचायत में बैठक कराए बिना ही कागजों में प्रस्ताव तैयार किए गए और रीबोर, खड़ंजा, नाली, इंटरलॉकिंग, कूड़ादान और ह्यूम पाइप के नाम पर भुगतान निकाल लिया गया। ग्रामीणों ने मंगलवार को जिलाधिकारी से शिकायत कर धारा 95(1)(जी) के तहत कार्रवाई, जिम्मेदारों के अधिकार सीज करने और सरकारी धन की रिकवरी सहित आपराधिक कार्यवाही करने की मांग की है।
भैसाना गांव के रहने वाले सूर्य प्रकाश सरोज, प्रभाकर तिवारी अमित मिश्र का आरोप है कि उनकी ग्राम पंचायत में कूड़ादान स्थापना के नाम पर 5.52 लाख रुपये से अधिक निकाले गए हैं जबकि गांव में कूड़ादान कहीं नजर नहीं आता है। ह्यूम पाइप के नाम पर भी करीब 4.45 लाख रुपये की निकासी का आरोप है। वहीं अप्रैल 2021 से मार्च 2026 के बीच हैंडपंप मरम्मत और रीबोर के नाम पर 11 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का दावा किया गया है, जबकि ग्रामीणों ने कई कार्य मौके पर नहीं होने की बात कही है।
खड़ंजा निर्माण में भी अभिलेख और जमीन के काम में अंतर का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार कागजों में 200 मीटर खड़ंजा दिखाया गया, जबकि मौके पर करीब 170 मीटर ही काम हुआ। इंटरलॉकिंग और नाली निर्माण के नाम पर भी बिना काम कराए भुगतान निकालने की शिकायत की गई है। पंचायत भवन और सार्वजनिक शौचालय के जीर्णोद्धार पर खर्च दिखाए जाने के बावजूद दोनों की बदहाली भी सवाल खड़े कर रही है। स्ट्रीट लाइट के नाम पर 1.08 लाख रुपये निकालकर महज 10 घटिया लाइटें लगाए जाने का भी आरोप है।
मामला यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों ने प्रधान के ससुराल पक्ष के लोगों के नाम मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी का भुगतान कराने का भी आरोप लगाया है। शिकायत में प्रधानपति, जो प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक बताए गए हैं, पर विद्यालय से संबंधित जिम्मेदारियों के बजाय फर्जी वर्क आईडी तैयार कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 18 जून को डीपीआरओ, 22 जून को सीडीओ और 1 जुलाई को जिलाधिकारी को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की जिला स्तरीय टीम गठित कराकर तकनीकी जांच कराने, पंचायत के भुगतान और अभिलेखों का मिलान कराने तथा दोषी पाए जाने वालों पर विभागीय कार्यवाही सहित एफआईआर दर्ज कराकर सरकारी धन की रिकवरी कराने की मांग की है। कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन और न्यायिक लड़ाई की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने शपथपत्र देकर डीएम से पूरे मामलें की शिकायत की है।
