अमेठी। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावों के बीच अमेठी के पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, उड़वा की तस्वीर सवाल खड़े करने वाली है। करीब 400 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में कागजों पर शिक्षक तैनात हैं, लेकिन कई शिक्षक विद्यालय में मौजूद नहीं हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और परीक्षा परिणाम के रूप में भुगतना पड़ रहा है। विद्यालय में 6 प्रवक्ता और 3 एलटी अध्यापकों की तैनाती बताई जा रही है। इसके बावजूद प्रवक्ता बृजेंद्र कुमार एक वर्ष के अवकाश पर हैं। वहीं अनुराग मिश्रा को गौरीगंज, अनुपम पाण्डेय को जगदीशपुर ब्लॉक और श्यामानंद रजक को भादर ब्लॉक से संबद्ध किए जाने की बात सामने आई है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिक्षक विद्यालय में पढ़ाने के लिए तैनात हैं तो उन्हें दूसरे स्थानों पर संबद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शासन स्तर पर शिक्षकों की इस तरह की संबद्धता की कोई व्यवस्था नहीं होने के बावजूद विद्यालय के शिक्षकों को अन्य स्थानों पर लगाया गया है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का दावा है कि इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में विद्यालय के करीब आधे विद्यार्थी असफल हो गए। यदि यह आंकड़ा सही है तो यह विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मामला सिर्फ परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है। करीब 400 विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन बच्चों के अभिभावक सरकारी विद्यालय पर भरोसा कर अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनके भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्षेत्रवासियों के मुताबिक इस समस्या की जानकारी जिला एवं विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से दी जा चुकी है। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे अभिभावकों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।लोगों की मांग है कि दूसरे स्थानों पर संबद्ध किए गए शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल तैनाती वाले विद्यालय में वापस भेजा जाए और विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई तो करीब 400 विद्यार्थियों के भविष्य के सवाल को लेकर व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं और क्या विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर कर विद्यार्थियों की पढ़ाई पटरी पर लाई जाती है।
एक साल की छुट्टी, दूसरे ब्लॉक में संबद्धता और विभागीय खामोशी से बिगड़ी पढ़ाई व्यवस्थाय बोर्ड परीक्षा में आधे छात्रों के फेल होने का दावा
