पीलीभीत। जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए लोग जहां केक काटने, पार्टी करने और महंगे उपहारों पर रुपये खर्च करते हैं, वहीं विकासखंड मरौरी के गांव महुआ निवासी पत्रकार राकेश बाबू के 16 वर्षीय पुत्र एवं कक्षा 11 के छात्र मृत्युंजय कुमार ने अपने जन्मदिन को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़कर अनूठी मिसाल पेश की। 18 सितंबर को जन्मदिन के अवसर पर मृत्युंजय ने पौधारोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने फलदार पौधों के साथ ही औषधीय और शोभाकार पौधे भी रोपे।मृत्युंजय कुमार शहर के स्प्रिंगडेल कॉलेज में कक्षा 11 के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ उनकी पर्यावरण संरक्षण में भी विशेष रुचि है। परिवार की ओर से लगातार मिल रहे प्रोत्साहन के चलते उन्होंने अपने जन्मदिन को पौधारोपण से जोड़ लिया है। यही वजह है कि हर वर्ष जन्मदिन के मौके पर वह पौधे लगाते हैं। इस वर्ष भी उन्होंने इस परंपरा को जारी रखते हुए विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे। मृत्युंजय का कहना है कि जन्मदिन पर लगाया गया पौधा केवल उस दिन की खुशी तक सीमित नहीं रहता। समय के साथ जब वह बड़ा होता है तो प्रकृति, पर्यावरण और समाज के लिए लंबे समय तक उपयोगी साबित होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और लगातार घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए पौधारोपण बेहद जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी करनी चाहिए।जन्मदिन पर पौधे लगाने के साथ मृत्युंजय ने उनके संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फलदार पौधे भविष्य में लोगों को फल और छाया देंगे, जबकि औषधीय एवं शोभाकार पौधे पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान देंगे।मृत्युंजय के पिता पत्रकार राकेश बाबू ने बताया कि बच्चों को शुरू से ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है। परिवार में पर्यावरण संरक्षण को लेकर मिलने वाली सीख का ही परिणाम है कि मृत्युंजय ने अपने जन्मदिन को पौधारोपण से जोड़ लिया। अब हर वर्ष जन्मदिन पर पौधे लगाना उनके लिए एक परंपरा बन चुका है।
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान उनके पिता राकेश बाबू, रेलवे गेट पर तैनात रविंद्र कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने मृत्युंजय की पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को जन्मदिन और अन्य विशेष अवसरों पर ऐसे रचनात्मक एवं समाजोपयोगी कार्यों के लिए आगे आना चाहिए।
मृत्युंजय की इस पहल ने यह संदेश दिया कि खुशियां मनाने के लिए केवल दिखावे और अनावश्यक खर्च की जरूरत नहीं है। प्रकृति के संरक्षण के लिए उठाया गया छोटा-सा कदम भी भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। जन्मदिन पर लगाए गए पौधे जहां आने वाले समय में पर्यावरण को हरा-भरा बनाने में योगदान देंगे, वहीं मृत्युंजय के लिए यह जन्मदिन लंबे समय तक एक सुखद और यादगार अवसर बना रहेगा।
