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नहटौर विधानसभा में पूर्व शिक्षाधिकारी शेर सिंह की दावेदारी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

 
शिक्षा, रोजगार और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय; आजाद समाज पार्टी से टिकट के दावेदार

विधान केसरी न्यूज नेटवर्क

नहटौर/बिजनौर। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर नहटौर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से सेवानिवृत्त शिक्षाधिकारी शेर सिंह की संभावित दावेदारी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक अनुभव, सामाजिक सक्रियता और स्थानीय लोगों से पुराने जुड़ाव के आधार पर उनके समर्थक उन्हें टिकट का मजबूत दावेदार बता रहे हैं।

शेर सिंह छात्र जीवन से ही सामाजिक और बहुजन आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार, उन्होंने वर्ष 1985-86 से सामाजिक जागरूकता अभियानों तथा बाद के चुनावों में सक्रिय भागीदारी की। वर्ष 1989 में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के युवाओं तथा श्रमिकों के मुद्दों को लेकर उन्होंने एक सामाजिक संगठन के माध्यम से काम शुरू किया।

शिक्षक परिवार से आने वाले शेर सिंह के पिता स्वर्गीय पूरन सिंह प्रधानाध्यापक थे। शेर सिंह ने बिजनौर और मुरादाबाद से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1997 में शिक्षाधिकारी के पद पर चयन के बाद उन्होंने बिजनौर जिले में लगभग 17 वर्षों तक सेवाएं दीं। नहटौर और हल्दौर क्षेत्र में लंबे समय तक तैनाती के कारण उन्हें स्थानीय शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण समस्याओं की जानकारी रखने वाला अधिकारी माना जाता है।

उन्होंने वर्ष 2002 से 2012 तक वामसेफ के जिला संयोजक के रूप में भी कार्य किया। समर्थकों का कहना है कि शिक्षा विभाग में कार्यकाल के दौरान उनकी छवि साफ-सुथरी रही और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं।

शिक्षा और रोजगार को बताया प्राथमिक मुद्दा

शेर सिंह ने नहटौर क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों के रिक्त पद, उच्च शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता और युवाओं के पलायन को प्रमुख मुद्दा बताया है।

उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र की बुनियादी शिक्षा मजबूत किए बिना सामाजिक और आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। वे वर्ष 2002 से मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करने का दावा भी करते हैं।

स्थानीय रोजगार के विषय में शेर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय उद्योगों और रोजगारपरक योजनाओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1989 में चीनी मिलों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने धरना-प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

नहटौर में पहले भी रहा है बेहद करीबी मुकाबला

नहटौर विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 में मुकाबला अत्यंत करीबी रहा था। भाजपा उम्मीदवार ओम कुमार ने राष्ट्रीय लोकदल के मुंशी राम को 258 मतों के अंतर से पराजित किया था। इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, संगठन और चुनावी रणनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

शेर सिंह के समर्थकों का मानना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव, स्थानीय पहचान और सामाजिक संगठनों से पुराना जुड़ाव उन्हें अन्य संभावित दावेदारों से अलग बनाता है। हालांकि आजाद समाज पार्टी की ओर से उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा होने तक उनकी दावेदारी को संभावित दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

टिकट मिलने पर मुद्दा आधारित चुनाव लड़ने का दावा

शेर सिंह का कहना है कि टिकट मिलने पर उनका अभियान शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण सड़कों, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहेगा।

अब राजनीतिक निगाहें आजाद समाज पार्टी के नेतृत्व पर टिकी हैं कि नहटौर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से पार्टी किसे उम्मीदवार बनाती है। आधिकारिक टिकट घोषणा के बाद ही चुनावी तस्वीर और संभावित मुकाबले की दिशा स्पष्ट होगी।

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