गुरसहायगंज/कन्नौज। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ शक्ति उपासना के लिए भी विशेष माना जाता है। नगर के सर्विस रोड़ पानी की टंकी के पास स्थित नर्मदेशवर मंदिर में इन दिनों सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पाठ को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिल रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्तोत्र देवी दुर्गा की उपासना से जुड़ा है और इसे दुर्गा सप्तशती के महत्वपूर्ण पाठों में से एक माना जाता है।
पंडित बलराम त्रिपाठी ने बताया कि मान्यता है सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद से है। इसमें देवी उपासना के बीज मंत्रों का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नियमित श्रद्धा और नियमपूर्वक पाठ करने से मन को शांति, आत्मबल और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
नगर के व्यापारी पंकज गुप्ता व कल्पना गुप्ता द्वारा किये जा रहें शिव पुराण का पाठ प्रत्येक सोमवार कों भक्ति भाव से हो रहा है। पंडित बलराम त्रिपाठी ने बताया कि सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का प्रसिद्ध बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ है। इसके पाठ को देवी शक्ति की उपासना का महत्वपूर्ण मंत्र माना जाता है। तांत्रिक परंपरा से जुड़े मंत्रों के मामले में योग्य गुरु या विद्वान से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।
भक्तों की मान्यता है कि सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के नियमित पाठ से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ती है। कई श्रद्धालु इसे संकट के समय देवी का स्मरण करने का माध्यम मानते हैं। धन, विवाह, व्यापार, ग्रहदोष, बाधा या रोग से जुड़े अनेक दावे लोक-मान्यताओं में प्रचलित है।
