पीलीभीत। सावन के पावन महीने में जहां कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन सक्रियता का दावा कर रहा है, वहीं गजरौला कस्बे से होकर गुजरने वाले एनएच-730 पर रात के समय पसरा अंधेरा इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब एक किलोमीटर लंबे डिवाइडर पर लगी 50 से 60 स्ट्रीट लाइटों में वर्तमान में महज छह लाइटें ही जल रही हैं। इनमें भी रोशनी बेहद कमजोर है। ऐसे में हाईवे से गुजरने वाले कांवड़ियों, राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एनएच-730 के बीच बने पक्के डिवाइडर पर एंगल लगाकर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। शुरुआत में इनसे रात के समय हाईवे पर पर्याप्त रोशनी मिलती थी, लेकिन लंबे समय से समुचित रखरखाव न होने के कारण व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। कई जगह खंभे क्षतिग्रस्त हैं, बिजली के कैबिनेट खराब पड़े हैं और केबलों में भी खराबी बताई जा रही है। कई लाइटें फ्यूज होने के कारण बंद हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खराब लाइटों को दुरुस्त कराने के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। कुछ समय पहले छह लाइटें बदली भी गईं, लेकिन अब उनकी रोशनी भी पर्याप्त नहीं है। इससे साफ है कि समस्या केवल बल्ब बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी लाइटिंग व्यवस्था के तकनीकी रखरखाव की जरूरत है।
सावन के दौरान इसी मार्ग से बड़ी संख्या में कांवड़ियों के जत्थे गुजर रहे हैं। रात के समय कांवड़ियों के साथ भारी वाहनों और छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में हाईवे पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होना हादसे का जोखिम बढ़ा रहा है।
अंधेरे के कारण सड़क पर घूमने वाले आवारा पशु भी वाहन चालकों को समय से दिखाई नहीं देते। वहीं पैदल चल रहे कांवड़ियों और अन्य राहगीरों की मौजूदगी भी कई बार अचानक सामने आने की स्थिति पैदा कर सकती है। ऐसे में पर्याप्त रोशनी सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक लगातार हो रहे सड़क हादसे ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे पर पर्याप्त रोशनी होने से वाहन चालकों को सड़क और सामने से आने वाले वाहनों की स्थिति अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकती है।हालांकि किसी भी दुर्घटना का कारण केवल स्ट्रीट लाइटों की खराबी को नहीं माना जा सकता, लेकिन सड़क पर पर्याप्त प्रकाश का अभाव निश्चित रूप से जोखिम को बढ़ा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर अधिकांश स्ट्रीट लाइटों का लंबे समय से बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने मांग की है कि महज कुछ लाइटें बदलने के बजाय पूरे डिवाइडर की लाइटिंग व्यवस्था का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
टूटे खंभों को बदलने, खराब केबलों की मरम्मत, बिजली के कैबिनेट दुरुस्त कराने और सभी स्ट्रीट लाइटों को पूरी क्षमता से चालू कराने की मांग की गई है।
कांवड़ यात्रा के दौरान यह मार्ग और अधिक संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद हाईवे की प्रकाश व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की तैनाती और यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं है। हाईवे पर पर्याप्त रोशनी भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यदि समय रहते एनएच-730 की लाइटिंग व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना के बाद जिम्मेदारों के जागने की नौबत आ सकती है। कांवड़ियों की भारी आवाजाही के बीच हाईवे को अंधेरे से बाहर निकालना अब संबंधित जिम्मेदार विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
