लखनऊ। राजधानी के नगर निगम जोन-6 अंतर्गत दुबग्गा क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण और उसके एवज में चल रहे अवैध वसूली के खेल का बड़ा मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, दुबग्गा से लेकर मछली मंडी तक रोडसाइड फुटपाथ और सर्विस रोड पर अवैध कब्जों की आड़ में हर महीने लाखों रुपये के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं।
सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, वसूली का यह पूरा तंत्र दुकानों के आकार पर निर्भर करता है।बड़े ढाबे, होटल और लकड़ी टाल से श्बड़ी वसूलीश् की जाती है।बड़ी स्थायी दुकानें से ₹1,000 से ₹2,000 प्रति माह तक की बंधी हुई श्महीनबारीश्।छोटी दुकानें से ₹500 प्रति माह।पटरी व ठेला विक्रेता से ₹300 प्रति माह वसूला जाता है।
इस अवैध नेटवर्क को चलाने का तरीका भी बेहद शातिर है। सैकड़ों दुकानदारों के बीच से ही एक दबंग या परिचित दुकानदार को श्अवैध वसूली का जिम्मेदार ठेकेदारश् बनाया जाता है। यह व्यक्ति सभी से रुपये एकत्रित कर नगर निगम जोन-6 के कर्मचारियों और उनके ड्राइवरों को एकांत स्थान पर गुप्त रूप से सौंपता है।
दुबग्गा में चारों तरफ फैले भीषण अतिक्रमण पर कार्रवाई न होने का मुख्य कारण नगर निगम के ही कुछ कर्मचारियों की मुखबिरी है। जब भी नगर निगम के उच्च अधिकारी क्षेत्र में श्अतिक्रमण हटाओ अभियानश् का आदेश देते हैं, तब निचले स्तर के कर्मचारी और ड्राइवर इसकी पूर्व सूचना दबंग अतिक्रमणकारियों को दे देते हैं।
इसके चलते कब्जाधारक कुछ समय के लिए अपना सामान हटा लेते हैं। इसके अलावा, वसूली देने वाले बड़े अतिक्रमणकारियों वाले स्थलों पर कर्मचारी उच्च अधिकारियों की टीम को जाने ही नहीं देते और केवल छुटपुट पटरियों पर खानापूरी करके लौट आते हैं।
दुबग्गा सब्जी मंडी के पास स्थिति बेहद खराब है।प्रेरणा स्थल रोड (जागर्स पार्क मार्ग) पर इंटरलॉकिंग फुटपाथ पर टीन शेड और झोपड़पट्टियाँ डालकर बड़ा अतिक्रमण कर लिया गया है। सब्जी मंडी का नाला पर मंडी की दीवार के पास नाले के ऊपर आलू-प्याज और अन्य सामानों के अवैध गोदाम (औढंतें) तान दिए गए हैं। नाले के पूरी तरह ढके होने के कारण सफाईकर्मी अंदर कचरे की सफाई नहीं कर पाते, जिससे भीषण गंदगी फैल रही है। सड़कों की इंटरलॉकिंग और सर्विस रोड पर चारों तरफ त्रिपाल बाँधकर बड़ी दुकानें सजा ली गई हैं।
क्षेत्र में सड़कों पर बढ़ते जाम और जनता को हो रही समस्याओं को देखते हुए अब नगर निगम के सक्षम अधिकारियों से कड़े कदम उठाने की माँग की जा रही है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान में लंबे समय से तैनात और संदिग्ध भूमिका निभाने वाले जोन-6 के कर्मचारियों व ड्राइवरों के आचरण और उनकी आय-संपत्ति की गोपनीय जाँच कराई जाए। जब तक भ्रष्ट कर्मचारियों पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक दुबग्गा में अतिक्रमण पर अंकुश लगाना नामुमकिन साबित होगा।
