पीलीभीत। चेहल्लुम का मेला देखने की मासूम इच्छा एक बालक को घर से दूर ले गई और रास्ता भटकने के बाद वह आधी रात अनजान जगह पर अकेला रोता मिला। गनीमत रही कि अमरिया बॉर्डर पर एक ट्रक चालक की नजर उस पर पड़ गई। चालक ने तत्काल आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की तत्परता से बालक को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचा दिया गया।
जानकारी के अनुसार, 8 अगस्त 2026 की रात करीब 12 बजे एक ट्रक चालक ने 112 नंबर पर सूचना दी कि अमरिया बॉर्डर के पास एक नाबालिग बालक अकेला रो रहा है। पूछताछ में पता चला कि वह बरेली जिले के नवाबगंज से पीलीभीत पहुंच गया है और रास्ता भटक जाने के कारण परेशान है।सूचना मिलते ही 112 पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे थाना सुनगढ़ी लाया गया। पुलिस ने मामले की जानकारी तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को दी।सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक निर्वान सिंह के निर्देश पर टीम पर्यवेक्षक त्रिभुवन सिंह एवं केस वर्कर प्रतुल सिंह थाना सुनगढ़ी पहुंचे। टीम ने बालक को अपनी सुपुर्दगी में लेकर उसकी काउंसलिंग की। बातचीत के दौरान बालक ने बताया कि वह नवाबगंज का रहने वाला है और जहानाबाद में लगे चेहल्लुम के मेले को देखने के लिए घर से निकला था। मेले की ओर जाते समय वह रास्ता भटक गया और अकेला पड़ गया।बालक की पहचान और पते की पुष्टि के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने थाना नवाबगंज से संपर्क किया। टीम की तत्परता से बालक के घर-पते की पुष्टि की गई और उसके परिजनों तक सूचना पहुंचाई गई।
इसके बाद बाल कल्याण समिति, पीलीभीत के आदेश पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए बालक को 24 घंटे के भीतर उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। लंबे समय तक अपने बच्चे के घर न लौटने से चिंतित परिजनों ने राहत की सांस ली।इस पूरे घटनाक्रम में एक ट्रक चालक की सजगता से शुरू हुई सूचना ने पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई का रूप लिया और आखिरकार एक भटके हुए मासूम को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचा दिया। समय रहते मिली मदद ने न केवल बालक को सुरक्षित किया, बल्कि यह भी साबित किया कि सजग नागरिक और संवेदनशील तंत्र मिलकर किसी संकट में फंसे बच्चे के लिए बड़ी सुरक्षा बन सकते हैं।
