TMC के बागी 20 सांसदों के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने PM मोदी से की मुलाकात
July 19, 2026
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए सांसदों के समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार (18 जुलाई 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. यह मुलाकात संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले हुई है, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. इस मुलाकात को पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद की गतिविधियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के समूह को संसद में अलग बैठने की अनुमति दे दी है. इस फैसले के बाद इन सांसदों को सदन में अपनी पार्टी से अलग पहचान मिल गई है. हालांकि, इन सांसदों के नए राजनीतिक समूह को आधिकारिक मान्यता देने का फैसला अभी नहीं हुआ है.
बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होने का फैसला किया. इसके बाद ये सांसद नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए. NCPI पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी है, लेकिन उसे अभी मान्यता प्राप्त नहीं है. इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उन्हें संसद में एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता दी जाए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फिलहाल उनकी संसद में अलग बैठने की मांग को स्वीकार कर लिया है, लेकिन NCPI के साथ उनके विलय को औपचारिक मान्यता देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. अधिकारियों के अनुसार यह मामला अभी विचाराधीन है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अलग हुए सांसदों के समूह ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी जताई है. रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सुदीप बंद्योपाध्याय को मॉनसून सत्र से पहले रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. इससे पहले 14 जुलाई को सुदीप बंद्योपाध्याय और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने नए संसदीय समूह की संगठनात्मक व्यवस्था के बारे में जानकारी दी. सुदीप बंद्योपाध्याय को समूह का फ्लोर लीडर बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जबकि काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप के रूप में प्रस्तावित किया गया.
सांसदों को शनिवार को अलग बैठने की अनुमति मिलने के बाद इस समूह को संसद में पहली औपचारिक पहचान मिली है. हालांकि, NCPI के बैनर तले उन्हें पूरी तरह से अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता मिलने का फैसला अभी बाकी है. 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले हुए इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अलग हुए सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के प्रति समर्थन दिखाया है और NDA का हिस्सा बनने की इच्छा भी जताई है.
